Chartered Accountant
नई दिल्ली : चार्टर्ड एकाउंटेंसी (Chartered Accountant) की पढ़ाई और परीक्षा पहले ही देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। एकाउंट्स यानि हिसाब-किताब पर पूरी तरह से केंद्रित चार्टर्ड एकाउंटेंसी की यह पढ़ाई करना छात्रों के लिये काफी मुश्किल होता रहा है। बेहद कम छात्र ही सीए परीक्षा में कामयाब होते हैं। लेकिन अब बदलते वक्त के साथ चार्टर्ड एकाउंटेंसी की पढ़ाई यानि पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि यह बदलाव सीए की पढ़ाई को और ज्यादा कठिन ही बनाने की संभावना भी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020)
में चार्टर्ड एकाउंटेंसी के लिये नया पाठ्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। इस पाठ्यक्रम में विविध विषयों को शामिल किया गया है। इस नये पाठ्यक्रम के हिसाब से देखें तो अब भविष्य में चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने का सपना देखनेवाले छात्रों को कॉमर्स और एकाउंटेंसी (Commerce and Accountancy) के साथ ही कई सारे अन्य विषयों की पढ़ाई भी करनी होगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सीए छात्रों को मनोविज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से लेकर डाटा साइंस और भारत संविधान से लेकर पारम्परिक ज्ञान और शिक्षा तक सब कुछ पढ़ने सीखने की व्यवस्था की गई है। इस प्रस्तावित सीए (CA) पाठ्यक्रम को केंद्र सरकार
(central government)
की मंजूरी का इंतजार है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के मुताबिक सीए पाठ्यक्रम में और भी कई बदलाव करने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। जैसे कि भविष्य में परीक्षा को कम्प्यूटर आधारित करने और भारतीय भाषाओं में भी संचालित करने जैसे बदलाव की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में देश में आठ लाख से अधिक छात्र हैं जो सीए बनना चाहते हैं और परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। आईसीएआई (ICAI) ने कॉमर्स के छात्रों की स्कूली स्तर से लेकर अंडरग्रैज्युएट स्तर तक की पढ़ाई को भी बदलते हुये आधुनिक पाठ्यक्रम तैयार किया है।
आईसीएआई के अध्यक्ष देबाशीष मित्रा के मुताबिक, आज छात्रों को तकनीक और प्रौद्योगिकी, नैतिकता और ज्ञान-विज्ञान के अन्य विषयों की जानकारी रखना भी जरूरी है। अगर वैश्विक स्तर पर अपनी योग्यता साबित करनी है तो छात्रों को अन्य विषयों का ज्ञान होना आवश्यक है। आज के जमाने में प्रौद्योगिकी को दरकिनार कर छात्र आगे नहीं बढ़ सकते।
Editorial

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