Amit Shah-Rahul Gandhi
नई दिल्ली (एजेंसी) : गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के त्रिपुरा में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण की निश्चित तारीख घोषित करने को सियासी चश्मे की दृष्टि से - देखा जा रहा है। शाह ने भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर 1 जनवरी 2024 को तैयार हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी तीन बड़े मुद्दों में राम मंदिर मुद्दा काफी अहम था। आम चुनाव से पहले अब शाह के मंदिर निर्माण तारीख की घोषणा को सियासी नजरिए से देखा जा रहा है।
राहुल को जवाब, मिशन 2024 की तैयारी
त्रिपुरा में शाह के बयान को राहुल गांधी (Rahul Gandhi)
को जवाब भी माना जा रहा है। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में राहुल भाजपा पर कटाक्ष करते थे, वो अपने भाषणों में भगवा दल पर आरोप लगाते थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। अब शाह के तारीख घोषित करने ऐलान को राहुल को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
शाह ने गुरूवार को त्रिपुरा में कहा था, दोस्तों मैं यहां आपको एक बात कहने आया हूं। 2019 के चुनाव में मैं भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष था और राहुल बाबा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राहुल बाबा हर रोज कहते थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे तिथि नहीं बातएंगे। माना जा रहा है कि पहली बार भाजपा (BJP) ने साफ-साफ मंदिर बनाने की तारीख घोषित कर अपने वोटर को भी साफ संदेश देने की कोशिश की है, भाजपा केवल वादे नहीं करती बल्कि उसे पूरा भी करती है।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस (Congress) ने अदालत में राम मंदिर के निर्माण को लटकाने की कोशिश की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद प्र.म. नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने राम मंदिर का निर्माण शुरू करवाया । प्र.म. ने भूमि पूजन किया और फिर यहां निर्माण शुरू हुआ।
विपक्षी दलों को जवाब दे शाह ने कर दिया बड़ा इशारा
शाह के त्रिपुरा (Tripura) में इस बयान को विपक्षी दलों को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले 8 सालों में विपक्षी दल भाजपा पर मंदिर की तारीख नहीं बताने को लेकर तंज कसते थे। विपक्ष राम मंदिर निर्माण को लेकर भगवा दल को इसलिए तंज कसते थे कि भाजपा तो मंदिर निर्माण की बात करती है लेकिन कोई तारीख नहीं बताती है।
राम मंदिर के जिक्र क्यों? शाह का इशारा समझिए
लेकिन असल सवाल तो है शाह ने अभी इसका जिक्र क्यों किया है। दरअसल, 2014 के आम चुनाव से पहले भाजपा के तीन अहम मुद्दे थे। अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म करना और समान नागरिक संहिता। राम मंदिर निर्माण की तारीख की घोषणा कर भाजपा ने दो मुद्दे पूरे करने का संदेश अपने वोटर्स को दे दिया है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया। दूसरी तरफ से मोदी सरकार (Modi Government) ने कश्मीर से भी आर्टिकल 370 को हटा दिया। अब भाजपा समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)
पर आगे बढ़ने के संकेत दे चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी ने तीन तलाक को अपराध घोषित करके इस दिशा कुछ हद तक सफलता हासिल कर ली है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राम मंदिर का मुद्दा उठाकर भाजपा ने अगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक दांव चल दिया है। कर्नाटक (Karnataka)में इस साल चुनाव होने हैं और माना जाता है कि यहां वोटों का ध्रुवीकरण होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि भाजपा यहां सत्ता में है तो उसके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए राम मंदिर वाला दांव चला गया है। 2024 में आम चुनाव होने हैं। अगर राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो इस चुनाव में राम मंदिर मुद्दा काफी भावनात्मक होगा और चुनावों पर इसका असर भी हो सकता है।
Editorial

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