Akhilesh Yadav-Rahul Gandhi-Mayawati
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 2024 लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Elections) के मद्देनजर एक तरह से विपक्ष और कांग्रेस की कसौटियां निर्धारित कर दीं। उत्तर प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा में विपक्षी नेताओं के शामिल न होने से संबंधित एक सवाल पर उन्होंने विपक्षी एकता से जुड़े तीन अहम पहलुओं को रेखांकित किया । एक, विपक्ष के तमाम नेता कांग्रेस से वैचारिक तौर पर जुड़े हैं । दो, ये अपने प्रभाव वाले राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर भाजपा (BJP) को चुनौती जरूर दे सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के लिए वैचारिक चुनौती कांग्रेस ही खड़ी कर सकती है । तीन, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कांग्रेस
(Congress)
की ही है कि विपक्षी दल न केवल कंफर्टेबल महसूस करें बल्कि उन्हें उपयुक्त सम्मान भी मिले। हालांकि ये कोई नई बातें नहीं हैं, लेकिन नए साल में 2024 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी एकता की कवायद तेज होने वाली है। इस संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का यह कहना अलग महत्व रखता है। भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के दौरान भी राहुल गांधी ने पार्टी के दायरे से ऊपर उठकर राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष का स्पेस ढ़ाया है। इसी भूमिका में आगे बढ़ते हुए शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने यात्रा में शामिल न होने के अखिलेश यादव और मायावती (Akhilesh Yadav and Mayawati) के फैसले को तूल न देते हुए बताया कि वे यात्रा में शामिल हों या न हों, विपक्ष की राजनीति में उनका अहम स्थान है । बहरहाल, अपने-अपने दायरे में इन दलों और नेताओं की कांग्रेस से लड़ाई भी है, जिसकी पार्टी अनदेखी भी नहीं कर सकती। इसलिए क्षेत्रीय राजनीतिक स्पेस में उनकी भागीदारी स्वीकार करते हुए भी राष्ट्रीय स्तर पर अपना दावा पुख्ता करने की राहुल की कोशिश समझी जा सकती है। इस बिंदु तक उनका प्रयास न केवल तर्कसंगत बल्कि समझदारी भरा भी कहा जाएगा। असल चुनौती इसके बाद शुरू होती है, जब सवाल इन कसौटियों पर अमल करने का आता है । यह कोई छुपी हुई चीज नहीं है कि भाजपा से विरोध की बात स्वीकार करते हुए और भारत जोड़ो यात्रा के पीछे की भावनाओं से सहमति जताते हुए भी मायावती
(Mayawati)
क्यों सिर्फ शुभकामनाएं जताकर रह गईं, यात्रा में शामिल होना मंजूर नहीं किया, क्यों अखिलेश निमंत्रण न मिलने की बात कहते हुए यहां तक बोल गए कि उनकी नजरों में भाजपा और कांग्रेस में कोई अंतर नहीं है और क्यों आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेता भाजपा को कोसते हुए भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला करने का कोई मौका नहीं चूकते। चूंकि इन सबको भाजपा विरोधी वोट में ही हिस्सेदारी करनी है, इसलिए एक लेवल तक आपसी प्रतिद्वंद्विता अनिवार्य है। हम सवाल यह है कि उस लेवल से आगे जो सौहार्द और सामंजस्य चाहिए, वह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। इसका जवाब सिर्फ बातों से नहीं बल्कि आने वाले समय में सही फैसलों से देने की चुनौती इन सभी दलों के सामने होगी ।
Editorial

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