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बोन कैंसर से पीड़ित टाइगर टी 24 की मौत
By EditorialPublished on
फिर उसे ट्रैंकुलाइज करके जांच हुई तो पता लगा कि उसके राइट वाले पैर में मौजूदा हड्डी के समानान्तर और अलग हड्डी बढ़ रही थी, जिससे टाइगर को हर दिन दर्द से गुजरना पड़ रहा था । उस वक्त चिकित्सकों ने टाइगर को ऑस्टियो सारकोमा बीमारी होना बताया था । लड़खड़ाता देखकर चिकित्सकों ने उसकी जांच की तो पता चला कि टाइगर टी-24 को बोन कैंसर जैसी बीमारी है। तब से टाइगर को जमीन पर पैर रखने में दिक्कत हो रही थी। टाइगर टी 24 के बूढ़े होने और बीमार होने से उसे चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए टाइगर को कुछ माह से सबसे एकांत

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उदयपुर. नगर संवाददाता : शहर के सज्जनगढ़ स्थित बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र टाइगर टी-24 उस्ताद की बुधवार को मौत हो गई। यह टाईगर 17 वर्ष का था और उसे वर्ष 2015 में रणथम्भौर से लाया गया था। उस्ताद के नाम से मशहूर टी 24 बोन कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित था, जिससे उसे चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी और वह चल भी नहीं पा रहा था। टाइगर की मौत के बाद सज्जनगढ़ में उसका पोस्टमार्टम किया गया। उस्ताद के नाम से मशहूर टाइगर टी 24 को साल 2015 में रणथम्भौर नेशनल पार्क से सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में लाया गया था। टाइगर ने रणथम्भौर नेशनल पार्क में दो वनकर्मियों और दो स्थानीय लोगों सहित 4 लोगों पर हमला करके उन्हें मार दिया था । इस वजह से उसे उदयपुर भेजने का निर्णय लिया गया, हांलाकि इस दौरान इसका विरोध भी काफी किया गया था । अक्टूबर 2022 माह में टाईगर को लड़खड़ाता देखकर चिकित्सकों ने इस हलचल को नोटिस किया था । फिर उसे ट्रैंकुलाइज करके जांच हुई तो पता लगा कि उसके राइट वाले पैर में मौजूदा हड्डी के समानान्तर और अलग हड्डी बढ़ रही थी, जिससे टाइगर को हर दिन दर्द से गुजरना पड़ रहा था । उस वक्त चिकित्सकों ने टाइगर को ऑस्टियो सारकोमा बीमारी होना बताया था । लड़खड़ाता देखकर चिकित्सकों ने उसकी जांच की तो पता चला कि टाइगर टी-24 को बोन कैंसर जैसी बीमारी है। तब से टाइगर को जमीन पर पैर रखने में दिक्कत हो रही थी। टाइगर टी 24 के बूढ़े होने और बीमार होने से उसे चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए टाइगर को कुछ माह से सबसे एकांत में एनक्लोजर में रखा गया था । बायोलॉजिकल पार्क में विजिट के आने वाले टूरिस्ट उसे देख नहीं पाते थे। टाईगर टी-24 के शरीर में किसी तरह की हलचल ना देखकर बॉयलोजिकल कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया। अधिकारियों ने इस बारे में पशु चिकित्सकों को बताया, इस पर पशु चिकित्सक मौके पर गए और जांच कर टाईगर टी-24 को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम किया गया और अब गुरूवार को सीतामाता में पुलिस-प्रशासनिक, राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में टाईगर का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वनकर्मी पर हमले के बाद लाइमलाइट में आया था टी-24
सात साल पहले 2015 में रणथम्भौर से लाए गए टी-24 ने 8 मई 2016 को एक वनकर्मी पर हमला करने के बाद लाइमलाइट में आया था । वनकर्मी की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर टी-24 को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। फिर दबाव में आकर वन विभाग ने उसे नेशनल पार्क में खुले जंगल से सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया था। टी-24 को वापस नेशनल पार्क में लाने के लिए भी वन्यजीव प्रेमियों ने प्रदर्शन किए। उस्ताद को वापस खुले जंगल में छोड़ने के लिए कोर्ट में याचिका तक लगाई। यह एक नेशनल इश्यू बना, लेकिन टी-24 की वापस रिहाई नहीं हो सकी। तब से टी-24 सज्जनगढ़ उदयपुर बायोलॉजिकल पार्क में था।
2005 में जन्मा उस्ताद तीन शावकों में सबसे फुर्तिला था
साल 2005 में रणथंभौर टाइगर रिजर्व फोरेस्ट में उस्ताद नाम के टाइगर का जन्म हुआ था। टाइगर झुमरू के घर तीन शावक का जन्म हुआ था। इनमें दूसरे नंबर का टी- 24 उस्ताद जन्मा था। जन्म से ही अन्य टाइगर की तुलना में उस्ताद की आंखों में तेज और चेहरे पर विशेष आकर्षण था । उस्ताद की मां का नाम गायत्री था । उस्ताद का एक बड़ा भाई और एक छोटा भाई भी था। बड़े भाई का नाम टी-23 भोला, जबकि सबसे छोटे भाई टी 34 कुंभा था। जब माता-पिता और तीन भाइयों के साथ उस्ताद जंगल से निकलता तो हर कोई उसे देखना चाहता था। जंगल में बचपन से ही अपना रुतबा कायम करना चाहता था। यही वजह है कि उसकी विशेष छवि और चेहरे के अलग आकर्षण की वजह से उसे लोग प्यार से उस्ताद कहते थे ।

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