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नकलची गिरोह सरकारी पद पाने के लिए करते हैं मोटा लेन-देन : कोर्ट
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अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोशन पटेल ने बताया कि आरपीएससी द्वारा 24 दिसम्बर को आयोजित द्वितीय ग्रेड विज्ञान विषय की परीक्षा में मूल परिक्षार्थी कुलदीप विश्नोई के स्थान पर फर्जी परीक्षार्थी श्रवणसिंह पुत्र रूधाराम उर्फ रूपाराम निवासी भीलों का वास टीवरी मिघानिया जोधपुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। रिमांड पर चल रहे आरोपी से दस्तावेज बरामद किये। आधार कार्ड सहित निवास स्थान की भी तस्दीक की गई। जांच पूर्ण होने पर बुधवार को शीतकालीन न्यायालय में पेश किया जहां उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिये। आरोपी की ओर से

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नगर संवाददाता. उदयपुर : शहर की हाथीपोल थाना पुलिस ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय रेजीडेंसी में आरपीएससी की द्वितीय ग्रेड परीक्षा में मूल परीक्षार्थी के स्थान पर फर्जी परीक्षार्थी द्वारा परीक्षा देते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपी को बुधवार को अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोशन पटेल ने बताया कि आरपीएससी द्वारा 24 दिसम्बर को आयोजित द्वितीय ग्रेड विज्ञान विषय की परीक्षा में मूल परिक्षार्थी कुलदीप विश्नोई के स्थान पर फर्जी परीक्षार्थी श्रवणसिंह पुत्र रूधाराम उर्फ रूपाराम निवासी भीलों का वास टीवरी मिघानिया जोधपुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। रिमांड पर चल रहे आरोपी से दस्तावेज बरामद किये। आधार कार्ड सहित निवास स्थान की भी तस्दीक की गई। जांच पूर्ण होने पर बुधवार को शीतकालीन न्यायालय में पेश किया जहां उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिये। आरोपी की ओर से उसके अधिवक्ता ने जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया जिस पर सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी संगीता डाबी ने तर्क दिया कि वर्तमान समय में सरकारी नौकरी के संदर्भ में तथा राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा गत काफी समय से प्रत्येक परीक्षा से पेपर लीक होने होने और लोक सेवा आयोग द्वारा कार्यवाही की जा रही है। परीक्षा में पेपर लीक करवाने में संगठित गिरोह की संलिप्तता बार-बार उजागर हो रही है। आरपीएससी द्वारा सरकारी की शिक्षक के चयन के लिए यह परीक्षा आयोजित करवाई जा रही है। शिक्षक आने वाली पीढ़ी का आधार स्तम्भ है । परीक्षा बार-बार निरस्त होने से आमजन का विश्वास सरकार, कानून, प्रशासनिक एवं न्याय व्यवस्था पर भी उठता है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद शीतकालीन न्यायालय के पीठासीन अधिकारी दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने फैसले में लिखा कि नकलची गिरोह द्वारा सरकारी पद के लिए नकल करवाये जाने को लेकर काफी पैसों का लेन-देन भी किया जाता है। नकलची गिरोह व नकलची अभ्यर्थियों द्वारा भारी आर्थिक खर्चा किये जाने से इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जमानत मिलने पर नकलची गिरोह अनुसंधान में कोई बाधा नहीं डालेंगे। परिस्थितियों की गंभीरता एवं समाज में इस प्रकार की घटनाओं की निरंतर बढ़ोतरी को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया ।

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