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नशे के कारोबार पर प्रहार
By EditorialPublished on
भारत सरकार नशे की तस्करी रोकने के लिए दूसरे देशों से सहयोग ले भी रही है और दे भी रही है। इसी का नतीजा है कि नशे की बरामदगी बढ़ने के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों की धरपकड़ तेज हुई है। जहां संप्रग सरकार के कार्यकाल में 2006 से लेकर 2013 तक साढ़े 22 लाख किलो ड्रग्स बरामद की गई थी, वहीं 2014 से लेकर अभी तक 62 लाख किलो से अधिक ड्रग्स पकड़ी गई । इसी अनुपात में नशा तस्करों की गिरफ्तारी भी बढ़ी है। स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नशा तस्करी के खिलाफ कहीं अधिक सक्रिय दिख रही है। चूंकि सीमांत राज्यों से बड़ी मात

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संजय गुप्त : संसद के शीतकालीन सत्र में देश में मादक पदार्थों के चलन और इस संबंध में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश को आश्वस्त किया कि दो वर्षों में देश के बड़े ड्रग्स माफिया और नशे के तस्कर सलाखों के पीछे भेज दिए जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार की ओर से लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी सदन को अवगत कराया। उनके कथन से यह झलका कि मादक पदार्थों की तस्करी ने जिस चुनौती का रूप धारण कर लिया है, मोदी सरकार उसका सामना करने के लिए तैयार है। यह किसी से छिपा नहीं कि मादक पदार्थ विदेश से तस्करी करके देश में लाए जा रहे हैं। वे हर संभव रास्ते से लाए जा रहे हैं। सबसे अधिक नशा समुद्री रास्ते से आ रहा है। मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी ने सतर्कता बढ़ाने के साथ अपनी कार्यप्रणाली बदली है। इसके अलावा इस एजेंसी ने अन्य एजेंसियों के साथ अपना तालमेल बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू किया है। चूंकि एनसीबी का सहयोग राष्ट्रीय जांच यानी एनआईए भी कर रही है, इसलिए नशे के कारोबार का जो अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, उस पर भी निगाह रखने में आसानी हो रही है।
भारत सरकार नशे की तस्करी रोकने के लिए दूसरे देशों से सहयोग ले भी रही है और दे भी रही है। इसी का नतीजा है कि नशे की बरामदगी बढ़ने के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों की धरपकड़ तेज हुई है। जहां संप्रग सरकार के कार्यकाल में 2006 से लेकर 2013 तक साढ़े 22 लाख किलो ड्रग्स बरामद की गई थी, वहीं 2014 से लेकर अभी तक 62 लाख किलो से अधिक ड्रग्स पकड़ी गई । इसी अनुपात में नशा तस्करों की गिरफ्तारी भी बढ़ी है। स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नशा तस्करी के खिलाफ कहीं अधिक सक्रिय दिख रही है। चूंकि सीमांत राज्यों से बड़ी मात्रा में नशे की तस्करी हो रही है, इसलिए सीमा की सुरक्षा करने वाले बलों को अधिक अधिकार दिए गए हैं। उन्हें नशा तस्करों की गिरफ्तारी के साथ मामला दर्ज करने का भी अधिकार दिया गया है। यह इसलिए उचित फैसला है, क्योंकि यदि यह काम एनसीबी या फिर किसी अन्य एजेंसी को सौंपा जाता तो यह एक खर्चीला उपाय होता । जब सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों को नशे की तस्करी रोकने के और अधिकार देने के गृह मंत्रालय के फैसले की प्रशंसा होनी चाहिए, तब कुछ राज्यों को इस पर आपत्ति है कि इन बलों को नशा तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज करने का अधिकार क्यों दिया गया? कुछ राज्यों ने ऐसी ही आपत्ति तब जताई थी, जब सीमा सुरक्षा बल के कार्यक्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया था । आखिर केंद्रीय बलों को और सक्षम बनाने के कदम का विरोध करने का क्या औचित्य ? राज्य सरकारों को यह समझना होगा कि नशे के कारोबार से निपटने में तभी सफलता मिलेगी, जब उनकी एजेंसियां केंद्रीय एजेंसियों को भरपूर सहयोग प्रदान करेंगी। राज्य सरकारों को नशे की तस्करी रोकने के लिए वैसी ही प्रतिबद्धता दिखानी होगी, जैसी केंद्र सरकार दिखा रही है। केंद्र सरकार राज्यों से लेकर जिला स्तर पर ड्रग्स के खिलाफ ढांचा तैयार करने के लिए नारकोटिक्स कोआर्डिनेशन कमेटी बना रही है। ये कमेटियां मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने में मददगार साबित होंगी। इसके अतिरिक्त इनसे लोगों और खासकर युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने में भी मदद मिलेगी। नशे के बढ़ते चलन के प्रति राज्य सरकारों को इसलिए चेतना चाहिए, क्योंकि यह एक गंभीर समस्या है। यह ऐसी समस्या नहीं जिससे मुंह मोड़ा जा सके। यह नई पीढ़ी के भविष्य को नष्ट करने का काम कर रही है। नशे का कारोबार ऐसी समस्या भी नहीं कि उस पर सस्ती राजनीति की जाए। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि कई विपक्षी सदस्यों ने संसद में इस पर तंज कसा कि गुजरात में कहीं अधिक ड्रग्स क्यों पकड़ी जा रही है? गृहमंत्री ने इस सवाल का यह सटीक जवाब दिया कि जो राज्य ज्यादा सजग है, वही नशे की अधिक बरामदगी कर पाने में सक्षम है। यदि गुजरात में अधिक ड्रग्स पकड़ी जा रही है तो इसका मतलब है कि वहां की एजेंसियां ज्यादा सजग हैं। इस सिलसिले में उन्होंने पंजाब का भी जिक्र किया कि यदि वहां ड्रग्स की बड़े पैमाने पर बरामदगी नहीं हो रही है तो इसका यह मतलब नहीं हो सकता कि वहां यह समस्या ही नहीं । यदि पंजाब में ड्रग्स की बरामदगी के साथ नशा तस्करों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है तो राज्य सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति के कारण। ध्यान रहे कि जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तो मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने का वादा किया गया था । इस पर वादे के अनुरूप काम नहीं हुआ है। आज पंजाब में मादक पदार्थों के सेवन की समस्या इस कदर बढ़ गई है कि कर्मठ नवयुवक नहीं मिल रहे हैं। पंजाब के हर गांव में दूसरा- तीसरा परिवार अपने युवाओं की नशाखोरी से परेशान है। देश में पाकिस्तान के रास्ते मादक पदार्थों की आवक के पीछे एक बड़ा कारण है तालिबान का अफगानिस्तान पर काबिज हो जाना । तालिबान अपनी कमाई अफीम की खेती से ही करता है । मादक पदार्थों की तस्करी से जो पैसा अर्जित किया जाता है, उसे अधिकांशत: गैर कानूनी और खासकर आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में किया जाता है। आम तौर पर पाकिस्तान से बहुत कम दाम में या फिर लगभग मुफ्त ड्रग्स भेजी जा रही है ताकि अधिक से अधिक युवा नशे के आदी हों और उनका भविष्य बर्बाद हो । स्पष्ट है कि पाकिस्तान नशे के जरिये पंजाब को कमजोर करना चाहता है। बेहतर होगा कि पंजाब के साथ अन्य राज्य और खासकर सीमावर्ती राज्य नशे की तस्करी रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी सजगता के साथ निभाएं, क्योंकि जो लोग स्थानीय स्तर पर नशे की तस्करी करते हैं, उन पर लगाम लगाने का काम राज्यों की सरकारों का ही है ।

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