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शहीद सुखाराम पंचतत्व में विलीन: सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार
By EditorialPublished on
इससे पहले सुखाराम के शहीद होने की सूचना मिली तो सावंतकुआं खुर्द समेत बावड़ी उपखंड इलाके में शोक की लहर छा गई। धोकल राम तरड़ के बेटे सुखाराम चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। सुखाराम के बड़े भाई जगदीश, सतपाल व छोटे भाई महेन्द्र हैं। मां रुकमा गम में डूबी है। मां रुकमा देवी के आंसू नहीं सूख रहे। शहीद की पत्नी जशोदा ने अंतिम दर्शन किए तो बेसुध ही हो गई। उसे परिजनों ने संभाला। 5 साल पहले ही सुखराम की शादी हुई थी। शहीद सुखाराम के अंतिम दर्शन करने दूर-दूर से लोग आए थे। उनके अंतिम संस्कार के दौरान लोग गगनभेदी न

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जोधपुर (सं) : सिक्किम के जेमा में शुक्रवार को आर्मी के ट्रक के खाई में गिरने से 16 जवान शहीद हो गए। हादसे में राजस्थान के भी 3 जवानों की शहादत हुई। जिनमें जोधपुर के सुखाराम भी शामिल थे। शहीद सुखाराम का रविवार को उनके पैतृक गांव सांवतकुआं खुर्द में अंतिम संस्कार हुआ।
जोधपुर से उनके पैतृक गांव तक सैनिक वाहन के साथ लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। वाहनों का रेला साथ चला। देश भक्ति नारे लगते रहे। पूरा इलाका शहीद के अमर रहने के नारों से गूंज उठा। तिरंगा यात्रा बावड़ी उपखंड के सावंतकुआं खुर्द पहुंची। सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
जोधपुर के बावड़ी उपखंड के गांव सांवतकुआं खुर्द में शहीद सुखाराम का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि सुखाराम के छोटे भाई महेंद्र ने दी।
शहीद के छोटे भाई महेन्द्र का रो-रोकर बुरा हाल था । उसने अपने लाडले बड़े भाई को मुखाग्नि दी तो बिलख पड़ा ।
इससे पहले सुखाराम के शहीद होने की सूचना मिली तो सावंतकुआं खुर्द समेत बावड़ी उपखंड इलाके में शोक की लहर छा गई। धोकल राम तरड़ के बेटे सुखाराम चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। सुखाराम के बड़े भाई जगदीश, सतपाल व छोटे भाई महेन्द्र हैं। मां रुकमा गम में डूबी है। मां रुकमा देवी के आंसू नहीं सूख रहे। शहीद की पत्नी जशोदा ने अंतिम दर्शन किए तो बेसुध ही हो गई। उसे परिजनों ने संभाला। 5 साल पहले ही सुखराम की शादी हुई थी।
शहीद सुखाराम के अंतिम दर्शन करने दूर-दूर से लोग आए थे। उनके अंतिम संस्कार के दौरान लोग गगनभेदी नारे लगाते रहे।
दो दिन पहले सिक्किम में सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ । उनमें से एक जवान बावड़ी क्षेत्र के जोइन्तरा ग्राम पंचायत के राजस्व गांव सावंतकुआं खुर्द का सुखाराम भी था । सुखाराम की पार्थिव देह शनिवार को रात 10 बजे जोधपुर पहुंची।
रविवार सुबह 7 बजे परिजन पार्थिव देह लेने जोधपुर पहुंचे। वहां से सैन्य वाहन के साथ पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंची। अंतिम यात्रा में सड़क के दोनों ओर खड़े होकर लोगों ने शहीद को श्रृद्धांजलि दी। पुष्प वर्षा कर भारत माता की जय के नारे भी लगाए।
शहीद होने की सूचना मिलते ही सैनिक के पैतृक गांव सावंतकुआं खुर्द सहित समूचे बावड़ी उपखंड क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। शहीद के पिता धोकलराम आर्मी व बीएसएफ में दो जगह सर्विस कर सेवानिवृत्त हुए हैं। बावड़ी से सांवतकुआं गांव पहुंचने के दौरान पार्थिव देह लाते सैन्य वाहन की तस्वीर ।
सुखाराम की शहादत की खबर मिली तो बावड़ी उपखंड में लोगों ने बाजार बंद कर दिए। सुखाराम के पिता धोकल राम भी आर्मी में थे । वे रिटायर हो चुके हैं। पिता की तरह सुखाराम देश की सेवा करना चाहता था। बाकी तीनों भाई खेती बाड़ी करते हैं
जोधपुर से उनके पैतृक गांव तक सैनिक वाहन के साथ वाहनों का रेला देश भक्ति नारों के साथ शहीद के अमर रहने के नारे लगाते हुए बावड़ी उपखंड के सावंतकुआं खुर्द पहुंचा।

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