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सतर्कता का संदेश
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संपादकीय : चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ कुछ पश्चिमी देशों में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने जिस तरह सतर्कता बरतनी शुरू की, वह उचित ही है। पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया, फिर प्रधानमंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक की। इन दोनों ही बैठकों से देश को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अभी कोरोना से सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह अच्छा है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर कई राज्य सरकारों ने भी हालात की समीक्षा की। यह सिलसिला कायम रहना चाहिए ।

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संपादकीय : चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ कुछ पश्चिमी देशों में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने जिस तरह सतर्कता बरतनी शुरू की, वह उचित ही है। पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया, फिर प्रधानमंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक की। इन दोनों ही बैठकों से देश को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अभी कोरोना से सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह अच्छा है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर कई राज्य सरकारों ने भी हालात की समीक्षा की। यह सिलसिला कायम रहना चाहिए । इसी के साथ जिन्होंने अभी तक बूस्टर डोज नहीं लगवाई, उन्हें यह लगवा लेनी चाहिए। यह भी समय की मांग है कि भीड़-भाड़ वाले स्थलों पर मास्क का इस्तेमाल किया जाए । चूंकि चीन में कोरोना संक्रमण गंभीर स्थिति में है, इसलिए यह उचित ही है कि वहां के साथ-साथ अन्य देशों से आने वाले यात्रियों का औचक परीक्षण किया जा रहा । इसके साथ कोरोना संक्रमित मरीजों का सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जा रहा है, ताकि वायरस की प्रकृति के बारे में समय रहते जाना जा सके। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि चीन में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट वीएफ-7 ने कहर मचा रखा है। इस पर निगाह रखी ही जानी चाहिए, लेकिन इस तथ्य की अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि यह चीन में तो घातक सिद्ध हुआ है, लेकिन भारत में नहीं। इस वायरस से ग्रस्त जो चंद मरीज भारत में मिले थे. वे संक्रमण फैलाते नहीं पाए गए। स्पष्ट है कि चीन में हालात बिगड़ने के बाद भी भारत को डरने की जरूरत नहीं। यह सही है कि कोरोना सरीखे वायरस के लिए कोई सरहद मायने नहीं रखती, लेकिन यह भी ध्यान रहे कि चीन की परिस्थितियां भारत से भिन्न हैं । सबसे बड़ा अंतर यह है वहां इस्तेमाल की गई वैक्सीन निष्प्रभावी सिद्ध हुई । विडंबना यह रही कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन में बनीं संदिग्ध क्षमता वाली वैक्सीनों को तो तुरंत मान्यता दे दी थी, लेकिन भारत में बनी वैक्सीन को मंजूरी देने में हीलाहवाली करता रहा। चीन के बिगड़ते हालात के बीच यह ठीक नहीं कि जब भारत सरकार के साथ विभिन्न राज्य सरकारें कोरोना को लेकर सावधान रहने का संदेश दे रही हैं, तब इसे लेकर सस्ती किस्म की राजनीति भी शुरू हो गई है। इसका कारण केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से राहुल गांधी को लिखी गई इस आशय की चिट्ठी है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पालन करें और यदि ऐसा न कर सकें तो यात्रा स्थगित कर दें। कांग्रेस ने चिट्ठी के इस दूसरे हिस्से पर गौर किया और तत्काल इस नतीजे पर पहुंच गई कि उसकी यात्रा रोकने की कोशिश की जा रही है।

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