✕
आचार्य ने दी सद्गुणों की सीख
By EditorialPublished on
आचार्य ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि जीवन में ज्ञान का परम महत्त्व है तो शुद्ध आचार का भी बहुत महत्त्व है। ज्ञान की वास्तविक सार्थकता तब होती है, जब वह जीवन में उतर जाए, आचरणगत हो जाए। ज्ञान और आचार दोनों तट हैं। दोनों को एक साथ मिलाने में दर्शन पुल की भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष सरिता कांकरिया, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष महावीर चौधरी, तेरापंथी सभा के मंत्री महावीर चौपड़ा, सुरेश जीरावला व तेरापंथ किशोर मण्डल के संयोजक भ श्यामसुखा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्

x
जोधपुर (कास) : आचार्य महाश्रमण अपने जोधपुर प्रवास के तीसरे दिन सरदारपुरा सरकार का अमर नगर पहुंचे। 3 किलोमीटर के इस विहार में उनको 3 घंटे लग गए। जगह जगह 40 स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। शुक्रवार को सरदारपुरा से प्रातः काल अगले गंतव्य की ओर गतिमान हुए तो आचार्य श्री के साथ भक्तिभावों से ओतप्रोत श्रद्धालुओं का हुजूम भी निकल पड़ा। आचार्यश्री की ऐसी कृपा पाकर जन-जन का मन हर्षविभोर बना हुआ था । सरदारपुरा से अमर नगर की कुल दूरी लगभग तीन किलोमीटर थी, लेकिन विशाल जुलूस और जनता की भावनाओं को स्वीकार करते हुए आचार्य श्री को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने में लगभग तीन घण्टे से भी ज्यादा का समय लग गया। आचार्य अमरनगर में स्थित जीरावला परिवार के निवास स्थान में आए।
आचार्य ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि जीवन में ज्ञान का परम महत्त्व है तो शुद्ध आचार का भी बहुत महत्त्व है। ज्ञान की वास्तविक सार्थकता तब होती है, जब वह जीवन में उतर जाए, आचरणगत हो जाए। ज्ञान और आचार दोनों तट हैं। दोनों को एक साथ मिलाने में दर्शन पुल की भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष सरिता कांकरिया, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष महावीर चौधरी, तेरापंथी सभा के मंत्री महावीर चौपड़ा, सुरेश जीरावला व तेरापंथ किशोर मण्डल के संयोजक भ श्यामसुखा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी । तेरापंथी समाज, टी.पी.एफ. के सदस्य, तेरापंथ महिला मण्डल व जीरावला परिवार की महिलाएं तथा कवि जैन ने पृथक्-पृथक् स्वागत गीत का संगान किया । जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र की विधायक श्रीमती सूर्यकान्ता व्यास ने भी आचार्य श्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि मैं अपने क्षेत्र की जनता की ओर से परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी का हार्दिक स्वागत करती हूं।

Editorial
Next Story
Related News
X
