President's rule imposed in Bihar_Nitish Kumar
नई दिल्ली (एजेंसी) : बिहार के छपरा जिले में जहरीली शराब पीने से 70 से ज्यादा लोगों की मौत का मामला मंगलवार को एक बार फिर से संसद में गूंजा ।
इस मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम छपरा का दौरा करने जा रही है, जिसे लेकर बवाल शुरू हो गया। राज्यसभा में कांग्रेस की लीडरशिप में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाया और वॉकआउट कर गए। कांग्रेस के अलावा बिहार की सत्ताधारी पार्टी राजद, जदयू ने इस मुद्दे पर हंगामा किया। यही नहीं तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर एकता दिखाई। इन सभी दलों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह मानवाधिकार आयोग का बेजा इस्तेमाल कर रही है। शून्यकाल में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। वहीं लोकसभा में भी यह मुद्दा उठा और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के अलावा लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी इस पर चर्चा की मांग की। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एनएचआरसी को छपरा का दौरा करना चाहिए और हालात का जायजा लेना चाहिए। यही नहीं चिराग पासवान ने तो बिहार में राष्ट्रपति शासन की मांग कर डाली और जहरीली शराब कांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग की । विपक्ष के सदन से वॉकआउट के बाद आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि भाजपा सरकार एनएचआरसी का राजनीतिक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि प्र.म. नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी हर तीन महीने में जहरीली शराब से लोगों के मरने का मामला सामने आता है। लेकिन वहां का दौरा एनएचआरसी ने कभी नहीं किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या मानवाधिकार आयोग ने कभी मोरबी का दौरा किया है या फिर यूपी के अलीगढ़ एवं मध्य प्रदेश और हरियाणा का दौर किया है? इस तरह के पक्षपात के विरोध में ही विपक्ष के दलों ने सदन से वॉकआउट किया है। टीएमसी की सांसद डोला सेन ने भी शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि एनएचआरसी की टीम गुजरात या यूपी नहीं जाती है, लेकिन उसके पास बिहार और बंगाल जाने के लिए समय है।

Editorial

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