Goswami Vrajraj Kumar
प्रातःकाल संवाददाता उदयपुर । गोस्वामी व्रजराज कुमार द्वारा वैष्णव मण्डल उदयपुर ने श्रीनाथजी चरित्रामृत कथा का दूसरा दिन रहा। हज़ारों वैष्णव कथा श्रवण के लिये पांडाल में पहुंचे । गोस्वामी ने कहा कि निष्काम भक्ति के माध्यम से हमें आत्मा और परमात्मा का मिलन करना है और अलौकिक आनंद की अनुभूति निरंतर ह्रदय में प्राप्त करनी है। भक्ति के माध्यम से हमारे जीवन में विवेक धैर्य सहनशक्ति बढ़ती है। जीवन में आने वाले संकट को सहन करने का बल मिलता है और उसी बल से ज़िन्दगी सरलता से जी सकते है। होनी टल नहीं सकती, लेकिन दुख का दौर जीवन में जल्दी समाप्त हो जाता है। सत्संग जीवन सही विनियोजन है जिससे मानव का आत्म कल्याण संभव है । व्रजभूमि के वृतांत आपने बताया कि यह व्रजभूमि साक्षात गौलोक भूमि एवम् श्री कृष्ण की लीलास्थली है। व्रजभूमि में समस्त तीर्थ स्थान समाहित है। श्रीनाथ जी प्राकट्य का प्रसंग सुनाया।
महाराज दुरूमिल कुमार बड़ौदा भी आज श्रीनाथजी की हवेली में आए जहाँ आज उनका मनोरथ आयोजित किया जिसमें चाँदी के डंके के बंगले में श्रीजी का श्रृंगार धराया गया।
कथा पर भक्तों को अपने उद्बोधन में श्री कृष्ण के दो रूप वेदातीत और दूसरे रसोवय स्वरूप जिसमें रसोवय स्वरूप गोपियों और वृज वासियों के प्रेम के कारण आज भी बृज में मौजूद जो परोक्ष रूप से अनवरत लीला चलती है और वही पूर्ण ब्रह्म है।
दूसरा स्वरूप जो वेदातीत स्वरूप जो जगन्नाथ तिरूपति रंगनाथ इत्यादि जो उपासना के स्वरूप है। आयोजन में राजकुमार नागदा, मनीष सोनी, हेमन्त चौहाण, रंजीत सिंह भाटी, राजेश बी मेहता, जयन्ति भाई पारीख, मुकेश भाई पारीख, कनु भाई पारिख एवं गजेन्द्र जी मन्दावत उपस्थित थे।
Editorial

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