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नई दिल्ली (एजेंसी)। बीते कई सालों से अलग-थलग पड़े विपक्ष में तवांग में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के मुद्दे ने जान सी फूंक दी है। बुधवार को सदन से विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया और इसका नेतृत्व कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने किया। यही नहीं अकसर कांग्रेस के नेतृत्व से दूरी बनाकर रखने वाली आम आदमी पार्टी और टीआरएस ने राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बुलाई बैठक में हिस्सा लिया।
इसके बाद वॉकआउट में भी दोनों पार्टियां शामिल रहीं। विपक्ष ने भारत-चीन झड़प के मुद्दे पर सरकार की ओर से चर्चा से इनकार का एकजुट होकर तीखा विरोध किया । टीएमसी भी 18 दलों के वॉकआउट में शामिल रही। लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी दलों की ओर से चर्चा की मांग को खारिज कर दिया, जिसके बाद वॉकआउट करके विरोध जताया गया । इस दौरान कांग्रेस ने 1962 की याद दिलाते हुए कहा कि तब जवाहर लाल नेहरू ने लोकसभा में चर्चा कराने की मंजूरी दी थी।
इस पर चर्चा से सरकार भागी नहीं थी । विपक्ष की मांग पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इस संबंध में संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी क्यों कांग्रेस से अलग दिखते हैं ममता, केजरी और केसीआर इसकी वजह यह है कि ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और केसीआर राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के तहत काम करते रहे हैं। ऐसे में तीनों ही दल संसद में कांग्रेस के साथ दिखने से परहेज करते रहे हैं । केसीआर ने बिहार जाकर नीतीश कुमार समेत कई नेताओं से मुलाकात भी की थी। इसके अलावा वह ममता बनर्जी, उद्धव समेत कई और नेताओं से भी मिल चुके हैं। वहीं कांग्रेस भी टीआरएस पर सीधा हमला बोलती रही है। तेलंगाना में अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने केसीआर पर अटैक किया तो वहीं कांग्रेस यह भी आरोप लगा चुकी है कि भाजपा के कहने पर ही केसीआर ने अपनी पार्टी का भारत राष्ट्र समिति कर लिया है।
Editorial

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