india china tawang
नई दिल्ली (एजेंसी)। अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद सियासी गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप सिलसिला तेज हो गया है। विपक्ष के आरोपों के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन के अंदर बयान दिया तो वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के बाहर जवानों की बहादुरी की तारीफ की। रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन के सैनिकों ने रिपोर्ट के मुताबिक चीनी भारतीय पोस्ट पर हमला किया सैनिक झड़प की पूरी तैयारी के था लेकिन तत्काल भारतीय साथ आए थे लेकिन भारतीय जवानों ने उनका मुंहतोड़ जवाब सेना को इस तरह की हरकत दिया और उन्हें भागकर वापस का अंदाजा पहले से ही था । जाने पर मजबूर कर दिया। बता ऐसे में जवान तैयारी के साथ थे दें कि यह घटना 9 दिसंबर की और उन पर जवाबी कार्रवाई है। अब मीडिया रिपोर्ट्स में यह कर दी। थोड़ी ही देर में चीन के भी कहा गया है कि तवांग में सैनिकों को छक्के छूट गए और भारतीय सैनिकों ने चीन की वे जान बचाकर भागने के पीएलए का वह हाल कर दिया, मजबूर गए। इसके बाद वे कि उन्हें भागकर जान बचानी अपनी तरफ जाकर पड़ी। सूत्रों का कहना है कि गिदड़ भभकी देने के लिए हवाई फायरिंग करने लगे। घटना के दो दिनों के बाद स्थानीय कमांडर ने अपने समकक्ष चीनी अधिकारी से फ्लैगमीटिंग की और साफ-साफ शब्दों में चेतावनी दे दी।
भारत ने फ्लैग मीटिंग में कहा कि अब इस तरह की हरकत नहीं होनी चाहिए। बता दें कि भारत और चीन में मई 2020 से ही तनाव बढ़ा हुआ है । तवांग में भी कुछ इसी तरह चीन ने चालबाजी की थी। लेकिन भारतीय सैनिकों ने जिस तरह से जवाब दिया
उसकी उम्मीद चीन को नहीं थी। चीन ने जब-जब इस तरह की हरकत की है उसे भारतीय जवानों के हौसलों के आगे घुटने टेकने पड़े और उल्टे पांव लौटना पड़ा। गलवान के हमले में कम से कम 40 चीनी सैनिक मारे गए थे। हालांकि चीन मौतों के आंकड़ों को छिपाता रहा। अमेरिकी रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के कम से कम 40 सैनिक गलवान में मारे गए थे। वहीं 20 भारतीय सैनिक भी शहीद हो गए थे।
चीन ने तोड़ी चुप्पी
तवांग की घटना के बाद चीन ने भी चुप्पी तोड़ दी है। उसने कहा है कि एलएसी पर हालात काबू में हैं और शांति कायम है। बता दें कि चीन के 300 सैनिकों ने भारतीय पोस्ट पर हमला किया था। झड़प में भारत के 6 जवान घायल हो गए वहीं चीन के 15 सैनिक चोटिल हुए। चीन ने तवांग और यंगात्से का कोई जिक्र नहीं किया है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन स्वांग रचकर यह जताने की कोशिश करता है कि वह सीमा पर शांति चाहता है। हालांकि भारत ने उसे हर जगह यही नसीहत दी है कि वह छिपकर वार करना और धोखे से अपनी नापाक मंशा जाहिर करना छोड़ दे । कई दौर की बातचीत के बाद भी भारत और चीन के बीच अभी पूरी तरह से कोई सहमति नहीं बन पाई। चीन ने 1967 में भी ऐसी ही हरकत की थी। उस समय नाथुला में चीनी सैनिकों ने भारतीय पोस्ट पर हमला किया था। भारतीय सेना वहां तीन स्तर की वायरिंग कर रही थी जो कि चीन को नागवार गुजरी। तब भी भारतीय सैनिकों ने इसी तरह जवाब दिया था और कम से कम 88 चीनी सैनिक मारे गए थे ।
Editorial

Editorial

Next Story