Korean Lover Game Digital addiction on teenagers : डिजिटल युग में ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल रिलेशनशिप ट्रेंड्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसी क्रम में हाल के दिनों में कथित तौर पर चर्चा में आए “कोरियन लवर गेम” ने अभिभावकों और समाज के बीच चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक आत्महत्या की घटना के बाद इस तरह के टास्क-आधारित ऑनलाइन गेम्स को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है।

क्या है ‘कोरियन लवर गेम’ ?

विशेषज्ञों के अनुसार “कोरियन लवर गेम” किसी एक आधिकारिक गेम का नाम नहीं है, बल्कि यह ऑनलाइन रोमांटिक या रिलेशनशिप आधारित रोल-प्ले गेम्स के एक पैटर्न को दर्शाने वाला शब्द माना जा रहा है। ऐसे गेम्स में यूजर को एक वर्चुअल पार्टनर या किरदार मिलता है, जो कोरियन संस्कृति से प्रेरित संवाद शैली और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से खिलाड़ी से संपर्क बनाए रखता है। इन गेम्स में K-पॉप, K-ड्रामा और कोरियन पॉप कल्चर का प्रभाव देखने को मिलता है, जिससे किशोर और युवा वर्ग विशेष रूप से आकर्षित हो जाते हैं।

कैसे दिए जाते हैं टास्क ?

ऐसे गेम्स की संरचना आमतौर पर चरणबद्ध होती है। शुरुआत में खिलाड़ी को सामान्य और हल्के कार्य दिए जाते हैं, जैसे—

  • निर्धारित समय पर चैट करना
  • निजी अनुभव या दिनचर्या साझा करना
  • वर्चुअल पार्टनर के साथ संवाद बनाए रखना

समय के साथ कुछ प्लेटफॉर्म पर ये टास्क भावनात्मक दबाव बढ़ाने वाले रूप ले सकते हैं। खिलाड़ी को यह महसूस कराया जाता है कि यदि वह टास्क पूरा नहीं करेगा तो वर्चुअल रिश्ता टूट सकता है या पार्टनर नाराज हो सकता है।

कब बन सकता है यह खतरनाक ?

रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसे गेम्स में सबसे बड़ा जोखिम तब पैदा होता है जब खिलाड़ी वर्चुअल और वास्तविक दुनिया के बीच अंतर समझने में कठिनाई महसूस करने लगता है। भावनात्मक जुड़ाव बढ़ने के कारण कुछ मामलों में मानसिक तनाव या आत्म-हानि से जुड़े संकेत भी सामने आ सकते हैं।

विशेषज्ञों ने इसे अतीत में सामने आए ब्लू व्हेल जैसे टास्क-आधारित गेम्स की प्रवृत्ति से जोड़कर देखा है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि सभी कोरियन-थीम आधारित गेम खतरनाक हों। कई गेम केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, लेकिन कुछ अनियंत्रित प्लेटफॉर्म इस पैटर्न का दुरुपयोग कर सकते हैं।

गाजियाबाद घटना के बाद बढ़ी चिंता :

हाल ही में गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक आत्महत्या के मामले ने इस विषय को राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चियां लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल गतिविधियों में अत्यधिक समय बिता रही थीं। हालांकि जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पुष्टि कर रही हैं, लेकिन इस घटना ने डिजिटल लत और किशोर मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

किशोर क्यों जल्दी प्रभावित होते हैं ?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था में भावनात्मक संवेदनशीलता अधिक होती है। जब कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों को अपनापन और विशेष होने का अनुभव देता है, तो वे उससे गहराई से जुड़ सकते हैं। कोविड काल के बाद ऑनलाइन समय बढ़ने से यह जोखिम और बढ़ गया है।

सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां :

डिजिटल विशेषज्ञ और शिक्षाविद बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी उपाय सुझाते हैं—

✔ गेमिंग समय की सीमा तय करना

✔ पैरेंटल कंट्रोल और डिजिटल मॉनिटरिंग अपनाना

✔ बच्चों से नियमित संवाद बनाए रखना

✔ संदिग्ध ऑनलाइन टास्क और प्लेटफॉर्म से दूरी बनाना

✔ मानसिक तनाव के संकेत दिखने पर विशेषज्ञ सहायता लेना

समाज के लिए चेतावनी :

डिजिटल मनोरंजन और वर्चुअल रिलेशनशिप की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह आवश्यक हो गया है कि परिवार, शैक्षणिक संस्थान और प्रशासन मिलकर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर जागरूक निगरानी रखें। गाजियाबाद जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि तकनीक के सकारात्मक उपयोग के साथ संतुलन और सतर्कता बनाए रखना समय की बड़ी आवश्यकता बन चुका है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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