US School Book Ban: अमेरिकी स्कूलों में 12 हजार किताबें बैन, रिकॉर्ड सेंसरशिप
नस्लवाद और LGBTQ+ विषयों पर आधारित पुस्तकों पर कार्रवाई, समीक्षा में AI के इस्तेमाल से सेंसरशिप और एकेडमिक फ्रीडम पर बहस तेज।

तस्वीर में एक छात्रा लाइब्रेरी की अलमारी में लगी किताबों को देखती हुई नजर आ रही है।
अमेरिका के पब्लिक स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान करीब 12 हजार किताबों को बैन किए जाने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल के भीतर 11 हजार 982 किताबों पर प्रतिबंध लगाया गया, जो अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इससे पहले किसी एक साल में इतनी बड़ी संख्या में किताबों को बैन नहीं किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, किताबों पर प्रतिबंध के पीछे इनमें शामिल विषयों को वजह बताया गया है। बैन की गई किताबों में ज्यादातर नस्लवाद, LGBTQ+ और अन्य संवेदनशील विषयों से जुड़ी हैं। इनमें 80 फीसदी से ज्यादा किताबें फिक्शन थीं। इसके अलावा यंग एडल्ट कैटेगरी की किताबों को भी स्कूलों से पूरी तरह हटा दिया गया। इस कार्रवाई के दायरे में कुल 7370 किताबें और 4 हजार से ज्यादा राइटर, इलस्ट्रेटर और ट्रांसलेटर आए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में किताबों पर प्रतिबंध लगाए जाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि किताबों की समीक्षा और उन्हें प्रतिबंधित करने के लिए जेनरेटिव एआई का सहारा लिया गया। आरोप है कि एआई ने कई किताबों को किसी तर्कहीन आधार पर ही बैन कर दिया। अमेरिका के टेक्सास और फ्लोरिडा में सबसे ज्यादा किताबों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी बड़ी संख्या में किताबों को बैन किए जाने की बात सामने आई है।
एक साल के भीतर करीब 12 हजार किताबों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमेरिका में सेंसरशिप को लेकर बहस तेज हो गई है। लोग एकेडमिक फ्रीडम और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दे उठा रहे हैं। उनका कहना है कि किताबें पढ़ने से रोकना सेंसरशिप की तरह है।
इस तरह शैक्षणिक सत्र 2025-26 में किताबों पर लगाए गए रिकॉर्ड प्रतिबंधों ने अमेरिकी स्कूलों में किताबों की उपलब्धता, एकेडमिक फ्रीडम और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े सवालों को केंद्र में ला दिया है।

Pratahkal Bureau
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