NEET परीक्षा से पहले टेलीग्राम बैन पर घमासान; कानूनी लड़ाई और जुबानी जंग तेज!
नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध और मैसेज एडिटिंग फीचर बंद करने के निर्देश के खिलाफ टेलीग्राम ने याचिका दायर की।

भारत सरकार द्वारा पेपर लीक नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत टेलीग्राम ऐप की एक्सेस पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बीच प्रदर्शित कंपनी का आधिकारिक लोगो।
Delhi High Court Telegram hearing : देश में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए एक बेहद सख्त कदम के बाद अब यह मामला कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ कंपनी ने सीधे न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है। टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार के इस कड़े फैसले को चुनौती देते हुए इस पर तुरंत रोक लगाने और राहत देने की मांग की है, जिस पर आज अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। गौरतलब है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और लीक की घटनाओं में इस ऐप के कथित इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने यह अभूतपूर्व कदम उठाया है, जिसने देश के करोड़ों डिजिटल यूजर्स और तकनीकी जगत के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
इस बड़े विवाद की पृष्ठभूमि में सरकारी आदेश के कानूनी और तकनीकी पहलू बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आगामी 22 जून तक टेलीग्राम की एक्सेस को पूरी तरह बैन कर दिया है, साथ ही 30 जून तक इसके मैसेज एडिट करने वाले फीचर को भी डिसेबल रखने का कड़ा निर्देश जारी किया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का इस पर साफ तौर पर कहना है कि नीट-यूजी 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों को निशाना बनाने के लिए कई फ्रॉड नेटवर्क टेलीग्राम ग्रुप्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार के मुताबिक, टेलीग्राम पर मिलने वाली बड़े ग्रुप बनाने की सुविधा, कड़ा गोपनीयता तंत्र (सीक्रेसी) और भारी-भरकम साइज की फाइल्स शेयर करने जैसे फीचर्स अनैतिक तत्वों और चीटिंग नेटवर्क चलाने वाले अपराधियों के लिए मददगार साबित हो रहे थे, जिसके चलते आईटी एक्ट के तहत यह सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई है।
दूसरी तरफ, टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पावेल दुरोव ने भारत सरकार के इस कदम पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए दुरोव ने इस फैसले को पूरी तरह गलत ठहराया और कहा कि कुछ चुनिंदा यूजर्स द्वारा लीक सामग्री शेयर करने की वजह से भारत के 15 करोड़ से ज्यादा निर्दोष टेलीग्राम यूजर्स को सजा दी जा रही है, जबकि असली इनसाइडर्स जिन्होंने पेपर लीक किया है, वे अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रतिबंध के बावजूद लीक की घटनाएं रुकी नहीं हैं, बल्कि लोग अब अन्य विकल्पों और ऐप्स पर शिफ्ट हो गए हैं। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए दुरोव ने आंतरिक सुरक्षात्मक कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी ने पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों ऐसे संदिग्ध चैनल्स को ब्लॉक किया है जो एग्जाम मैटेरियल और स्कैम से जुड़े थे, साथ ही बैकडेटिंग धोखाधड़ी को रोकने के लिए 'एडिटेड' लेबल को भी अधिक विजिबल बनाया जा रहा है। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि इस कानूनी लड़ाई का नतीजा देश में डेटा प्राइवेसी, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी नियंत्रण के भविष्य को तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
