श्रीनगर। शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाने और हर बच्चे को पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराने के प्रशासनिक दावों के बीच निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घाटी के कई निजी स्कूलों में बकाया फीस जमा नहीं कराने वाले विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने से रोका जा रहा है। उन्हें स्कूल से वापस घर भेजा जा रहा है। इतना ही नहीं, कई स्कूलों ने विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और रिजल्ट कार्ड भी रोक दिए हैं। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन ने स्कूली वाहन चालकों को भी निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यार्थियों की फीस पूरी तरह जमा नहीं है, उन्हें वाहन में बैठने की अनुमति न दी जाए।

निजी स्कूलों की इस कार्रवाई से विद्यार्थी और उनके अभिभावक परेशान हैं। शिक्षा के अधिकार और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहे इस असर के बीच प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।

निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि बकाया फीस जमा नहीं होने पर स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम सार्वजनिक नहीं कर रहा है। उन्हें न तो कक्षाओं में बैठने दिया जा रहा है और न ही स्कूल वाहनों से आने-जाने की अनुमति मिल रही है। अभिभावकों के अनुसार, स्कूल प्रशासन ने संबंधित शिक्षकों और स्कूली वाहनों के चालकों को बकाया फीस वाले विद्यार्थियों की सूची सौंप रखी है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इन विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने और स्कूल वाहनों में सफर करने की अनुमति नहीं दी जाए।

एक निजी स्कूल की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि स्कूल प्रशासन ने उसका परीक्षा परिणाम रोक दिया था। किसी तरह उसे अपने परिणाम की जानकारी मिली, जिसमें उसने सातवीं कक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की थी। नई कक्षाएं शुरू होने के बाद वह अगली कक्षा में बैठने लगी थी। इसी दौरान उसके पिता ने बकाया फीस की आधी रकम जमा कराने की कोशिश की, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने पूरी बकाया फीस जमा होने के बाद ही रिजल्ट कार्ड देने की बात कही।

छात्रा के अनुसार, इसके बाद उसके क्लास टीचर ने उसे कक्षा से बाहर निकाल दिया और कहा कि जब तक वह पूरी बकाया फीस जमा नहीं करवाती, तब तक उसे कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इसी तरह तारिक अहमद सुहाफ नामक अभिभावक ने शिकायत की कि बकाया फीस जमा नहीं होने के कारण स्कूल ने उनके दोनों बच्चों के परीक्षा परिणाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरी बकाया फीस जमा कराने के बाद ही बच्चों के रिजल्ट कार्ड सौंपे जाएंगे। सुहाफ ने बताया कि स्कूलों में नई कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन फीस की बकाया रकम जमा नहीं करा पाने के कारण उनके दोनों बच्चे घर पर बैठे हैं।

स्कूल वाहन से जुड़ी शिकायत भी सामने आई है। सकीना अमान नामक महिला अभिभावक ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए स्कूली वैन लगवाई हुई है। नया अकादमिक सत्र शुरू होने पर उन्होंने रोज की तरह बेटी को उसी वैन से स्कूल भेजने की कोशिश की। उन्होंने सोचा था कि बकाया फीस बाद में जमा करवा देंगी, लेकिन वैन चालक ने उनकी बेटी को वाहन में बैठाने से इन्कार कर दिया। चालक ने कहा कि उसकी बकाया फीस अभी जमा नहीं हुई है।

सकीना अमान के मुताबिक, जब उन्होंने चालक से पूछा कि उसे बकाया फीस की जानकारी कैसे मिली, तो उसने उन्हें उन विद्यार्थियों की सूची दिखाई, जिन्होंने अपनी फीस जमा नहीं करवाई थी।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए जागरण ने प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन और संबंधित शिक्षा विभाग से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि घाटी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पहली से 9वीं कक्षा तक की परीक्षाएं हो चुकी हैं और उनके परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत नई कक्षाएं भी शुरू हो गई हैं, जो इस वर्ष सर्दियों के अवकाश की घोषणा तक जारी रहेंगी।

ऐसे में बकाया फीस के नाम पर विद्यार्थियों को कक्षाओं से बाहर रखने, रिजल्ट कार्ड रोकने और स्कूल वाहनों में सफर से वंचित करने की शिकायतों ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story