ऋषि शिव प्रसन्ना अपनी असाधारण प्रतिभा और कम उम्र में हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों के कारण चर्चा में रहे हैं। छोटी सी उम्र में ही बच्चों द्वारा अपनी प्रतिभा से ऐसी पहचान बना लेना अक्सर लोगों को हैरान कर देता है, और ऋषि शिव प्रसन्ना भी ऐसे ही प्रतिभाशाली बच्चों में शामिल हैं। मात्र 12 साल की उम्र के ऋषि शिव प्रसन्ना का IQ लेवल 180 है, जो कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुमानित IQ (160) से भी ज्यादा है।

वह एक गूगल-सर्टिफाइड एंड्रॉयड डेवलपर होने के साथ-साथ 8 किताबों के लेखक भी हैं। उनकी इस असाधारण प्रतिभा के लिए उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल चुके हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर ऋषि शिव प्रसन्ना कौन हैं, उनकी रुचियां क्या हैं और उन्होंने इतनी कम उम्र में यह मुकाम कैसे हासिल किया।

कौन हैं ऋषि शिव प्रसन्ना और कहां के रहने वाले हैं?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आधिकारिक X पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऋषि शिव प्रसन्ना मूल रूप से कर्नाटक के मैसूर जिले के नंजनगूड कस्बे से ताल्लुक रखते हैं। साल 2023 में वह अपने माता-पिता के साथ बेंगलुरु के उत्तरहल्ली इलाके में रहते थे। उनके परिवार में उनके पिता प्रसन्न कुमार एम. एक इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी मां राचेश्वरी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। ऋषि की शुरुआती प्रतिभा का पता उनके स्कूल के शुरुआती कुछ वर्षों में ही चल गया था, जब उनके शिक्षकों ने ध्यान दिया कि वह अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में नई चीजों को बहुत जल्दी और आसानी से समझ लेते हैं।

छोटी उम्र में ही शुरू कर दी थी कोडिंग सीखना

ऋषि की इन सभी उपलब्धियों के पीछे उनकी गहरी जिज्ञासा और तकनीक सीखने की लगातार रुचि की बहुत बड़ी भूमिका रही है। उन्हें बचपन से ही विज्ञान, अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में जानने का बहुत शौक था। धीरे-धीरे उनकी यह रुचि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और मोबाइल ऐप बनाने की ओर बढ़ने लगी। उन्होंने महज 5 साल की उम्र से ही कोडिंग सीखनी शुरू कर दी थी। इसी मजबूत रुचि के चलते उन्होंने कम उम्र में ही एंड्रॉयड ऐप डेवलप करने की दिशा में सराहनीय काम किया।

मोबाइल ऐप निर्माण और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

ऋषि ने बच्चों और आम जनता के उपयोग के लिए कई उपयोगी मोबाइल ऐप भी बनाए हैं। उनके द्वारा बनाए गए प्रमुख ऐप्स में 'IQ टेस्ट ऐप फॉर किड्स' (IQ Test App for Kids), 'कंट्रीज ऑफ द वर्ल्ड' (Countries of the World) और 'कोविड हेल्प फॉर बेंगलुरुियंस' (COVID Help for Bangaloreans - CHB) शामिल हैं। इनमें से कोविड हेल्पलाइन ऐप का मुख्य उद्देश्य महामारी के उस कठिन दौर में बेंगलुरु के लोगों तक सटीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाना था। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में किए गए उनके इसी उत्कृष्ट कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली, जिसके चलते उन्हें इनोवेशन कैटेगरी में 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023' से सम्मानित किया गया|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऋषि शिव प्रसन्ना की काबिलियत और प्रतिभा की तारीफ कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा था कि युवाओं में इनोवेशन का जश्न मनाया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने बताया था कि ऋषि को ऐप्स बनाने का बहुत शौक है और उनकी विज्ञान में भी उतनी ही गहरी दिलचस्पी है, साथ ही वह युवाओं के बीच इसे लोकप्रिय बनाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने बाल पुरस्कार विजेता से मिलकर बेहद खुशी जताई थी।

12 साल की उम्र तक लिख डाली 8 किताबें

रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषि की प्रतिभा केवल कंप्यूटर और तकनीक की दुनिया तक ही सीमित नहीं रही है। उन्हें किताबें पढ़ने और नई-नई जानकारियां हासिल करने में भी बहुत आनंद आता था। उनका लेखन का सफर शुरुआती दौर से आगे बढ़ते हुए काफी समृद्ध हुआ और मात्र 12 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने कुल 8 किताबें लिख डाली थीं। उनकी इन किताबों में विज्ञान, कल्पना और ज्ञान से जुड़े विषयों को बच्चों के लिए बहुत ही रोचक और सरल तरीके से प्रस्तुत करने की ललक साफ दिखाई देती है।

अल्बर्ट आइंस्टीन से भी ज्यादा IQ होने का दावा

ऋषि शिव प्रसन्ना का इंटेलिजेंस कोशिएंट (IQ) 180 बताया जाता है। उनके इस उच्च IQ की तुलना अक्सर महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुमानित IQ से की जाती है। हालांकि अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने जीवनकाल में कोई औपचारिक IQ टेस्ट नहीं दिया था, इसलिए उनका IQ लगभग 160 होने का आंकड़ा भी केवल एक अनुमान पर ही आधारित माना जाता है। कम उम्र में ऋषि शिव प्रसन्ना की यह असाधारण सफलता आज देश और दुनिया के लाखों बच्चों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन चुकी है।



Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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