लखनऊ में बिना नियम के चल रहे मदरसों पर प्रशासन की कार्यवाही बहुत धीमी है, जिससे सवाल उठ रहे हैं। दो साल पहले नेपाल की सीमा से लगे जिलों में मदरसों में शक वाली गतिविधियाँ पकड़ी गई थीं। इसके बाद सरकार ने पूरे राज्य में विशेष जाँच अभियान चलाने के आदेश दिए थे। उसी जाँच में राजधानी लखनऊ में कई हैरान करने वाले सामने आए। जिला प्रशासन, पुलिस और मदरसा बोर्ड की संयुक्त टीम ने लगभग 200 मदरसों की जाँच की। रिपोर्ट में पता चला कि शहर में 99 मदरसे पंजीकृत हैं, जिनमें से 19 को सरकारी अनुदान मिलता है। लेकिन 111 मदरसे बिना किसी मान्यता या पंजीकरण के चल रहे हैं। ये मदरसे अलग-अलग धार्मिक संस्थाओं से पैसा ले रहे थे, मगर उनकी कमाई-खर्च का कोई साफ हिसाब नहीं दे सके।

सूत्रों के अनुसार, कई मदरसा संचालक यह भी नहीं बता पाए कि उनके संस्थानों में कितने बच्चे पढ़ते हैं। जो उपस्थिति रजिस्टर दिखाए गए, उनमें छात्रों के पते अधूरे मिले। ज्यादातर बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी, जबकि सामान्य शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं था। यह स्थिति शासन के उन निर्देशों के विपरीत है, जिनमें ऐसे संस्थानों पर निगरानी और कार्रवाई के आदेश बार-बार दिए जा चुके हैं। बीते वर्ष दुबग्गा क्षेत्र में आतुल कासिम अल इस्लामिया मदरसे से पुलिस ने बिहार से लाए गए 21 बच्चों को मुक्त कराया था। जांच में सामने आया कि बच्चों को कट्टरपंथी विचारधारा की शिक्षा दी जा रही थी।


पहले भी कई मदरसों के खिलाफ ऐसी शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। जुलाई 2021 में काकोरी के सीते विहार कॉलोनी से एटीएस ने अलकायदा का एक संदिग्ध आतंकवादी गिरफ्तार किया था। इससे पहले 2017 में इसी इलाके में आइएस का आतंकवादी सैफुल्ला मुठभेड़ में मारा गया था। इन घटनाओं के बावजूद अनियंत्रित मदरसों की गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लग सकी।


इसी बीच जलालुद्दीन उर्फ़ छांगुर के नेटवर्क का मामला फिर से प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसने सैकड़ों लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था, जिसके बाद उसकी गतिविधियाँ चर्चा में आईं। इसके बावजूद अब तक शासन या स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह स्थिति दर्शाती है कि बिना पंजीकरण वाले मदरसों और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण की जरूरत और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन संस्थाओं की समय-समय पर पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो यह सिर्फ धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहकर सामाजिक और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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