CBSE री-चेकिंग फीस विवाद पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला। कॉपियों की मोबाइल स्कैनिंग और टेंडर शर्तों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए बोर्ड को घेरा। पढ़े पूरा मामला

Rahul Gandhi on CBSE rechecking fee : देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के सबसे बड़े स्तंभ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कार्यप्रणाली को लेकर देश की सियासत में एक नया उबाल आ गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीबीएसई की प्रशासनिक गलतियों का खामियाजा सीधे तौर पर देश के निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी ही कॉपियों की सही जांच कराने के लिए विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूली जा रही है, जो शिक्षा को सेवा से बदलकर मुनाफे का कारोबार बनाने जैसा है।

'सीबीएसई की गलती, सजा बच्चे की और कमाई सरकार की'

नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा, "जेबकतरों से सावधान, आज वो CBSE के अंदर बैठे हैं।" राहुल गांधी ने इस बात पर गहरी चिंता और आपत्ति जताई कि यदि सीबीएसई के स्तर पर किसी छात्र के अंकों के मूल्यांकन में गलती होती है, तो उस गलती को सुधरवाने के लिए भी पीड़ित छात्र को ही जेब ढीली करनी पड़ती है।

अपने आरोपों की पुष्टि के लिए उन्होंने बोर्ड द्वारा वसूली जाने वाली फीस का पूरा विवरण भी सार्वजनिक किया। राहुल गांधी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

  • डिजिटल स्कैन कॉपी : प्रति विषय कॉपियों की डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए छात्रों से 100 रुपये वसूले जा रहे हैं।
  • री-टोटलिंग शुल्क : अंकों की दोबारा गिनती (Re-totaling) कराने के लिए भी प्रति पेपर 100 रुपये का शुल्क निर्धारित है।
  • री-इवैल्यूएशन : किसी उत्तर का पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये की दर से भुगतान करना पड़ता है।

उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद अपनी ही उत्तर पुस्तिका की निष्पक्ष जांच कराने के लिए एक आम छात्र को करीब 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

4 लाख आवेदनों के जरिए करोड़ों की कमाई का दावा :

राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को एक बड़े वित्तीय गणित से जोड़ते हुए दावा किया कि इस सत्र में लगभग 4 लाख छात्रों ने कॉपियों की री-चेकिंग और स्कैनिंग के लिए आवेदन किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों से सीबीएसई ने कितनी भारी कमाई की होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कांग्रेस नेता ने तकनीकी लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग गंभीर उपकरणों के बजाय साधारण मोबाइल फोन से की गई हो, तो गलत मार्किंग की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसके बाद उस तकनीकी खामी को ठीक करने के नाम पर छात्रों से ही वसूली करना बेहद अन्यायपूर्ण है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जब शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया जाता है, तो गलतियों को सुधारने के बजाय उन्हें राजस्व बढ़ाने का जरिया बना लिया जाता है, जिसका सीधा असर देश के बच्चों के समय, आत्मविश्वास और भविष्य पर पड़ रहा है।

टेंडर की शर्तों में हेरफेर और मोबाइल स्कैनिंग का सनसनीखेज आरोप :

इस विवाद की जड़ें केवल फीस वसूली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राहुल गांधी ने सीबीएसई द्वारा जारी किए गए टेंडरों की प्रक्रियागत और कानूनी शर्तों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया यूजर 'सार्थक सिद्धांत' की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी सामने रखी। उक्त यूजर ने कक्षा 12वीं की कई उत्तर पुस्तिकाओं की धुंधली और खराब तस्वीरें साझा करते हुए पूछा था कि यदि इन कॉपियों को स्कैन करने के लिए उच्च श्रेणी के स्कैनर का उपयोग किया गया था, तो इनकी गुणवत्ता इतनी खराब क्यों है?


राहुल गांधी ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए इस तकनीकी विफलता के पीछे के प्रशासनिक खेल को उजागर किया। उन्होंने दावा किया कि:

  • मई 2025 का पहला टेंडर : सीबीएसई द्वारा मई 2025 में जो पहला टेंडर जारी किया गया था, उसमें स्पष्ट रूप से अनिवार्य शर्त थी कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग 'ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर' के माध्यम से की जाएगी। साथ ही कॉपियों की बाइंडिंग को सुरक्षित रखते हुए न्यूनतम 300 DPI (Dots Per Inch) रेजोल्यूशन पर स्कैनिंग करना तय हुआ था।
  • अगस्त का दूसरा टेंडर : आरोप है कि अगस्त महीने में सीबीएसई ने दोबारा टेंडर जारी किया और बैकडोर से इन महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक शर्तों को चुपचाप हटा दिया। नए टेंडर में "रोबोटिक स्कैनर" शब्द को सामान्य कर दिया गया और स्कैनिंग की गुणवत्ता के मानक (Resolution) को 300 DPI से घटाकर सीधे 200 DPI कर दिया गया।
  • राहुल गांधी ने दावा किया कि शर्तों में यह बदलाव एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि बाद में सामने आए खुलासों के अनुसार 'COEMPT' नामक आउटसोर्स एजेंसी ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग पेशेवर स्कैनर्स के बजाय साधारण मोबाइल फोन के कैमरों से की थी।

व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग :

लेख के अंत में, देश की शिक्षा प्रणाली में आई इस बड़ी विसंगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से पूरे टेंडर घोटाले और फीस वसूली प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और उनके मानसिक मनोबल से जुड़े संवेदनशील मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। यह देशव्यापी मुद्दा इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी बोर्ड ही मुनाफाखोरी की राह पर चल पड़ेंगे, तो देश के मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्र न्याय पाने से वंचित रह जाएंगे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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