नीति आयोग के ताजा विश्लेषण में पंजाब ने शिक्षा बजट, बुनियादी ढांचे और लर्निंग आउटकम्स में सुधार के दम पर देश में पहला स्थान हासिल किया है।

Punjab tops school education quality : भारत में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को लेकर दशकों से जारी बहसों के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला राज्य शीर्ष पर उभरकर सामने आया है, जिसने पारंपरिक रूप से शिक्षा के गढ़ माने जाने वाले राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। नीति आयोग द्वारा मई 2026 में जारी ताजा विश्लेषण के अनुसार, पंजाब ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कायाकल्प करते हुए पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। राज्य के प्रशासनिक गलियारों से लेकर राष्ट्रीय पटल तक इस समय पंजाब के इस बड़े शैक्षणिक बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है। पंजाब ने न केवल अपनी पुरानी स्थिति में सुधार किया है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहने वाले केरल, महाराष्ट्र और देश की राजधानी दिल्ली जैसे कड़े प्रतिस्पर्धियों को भी पछाड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस बड़े बदलाव की नींव नीति आयोग के उन व्यावहारिक आंकड़ों में साफ दिखाई देती है, जो छात्रों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम्स) में हुई भारी बढ़ोतरी को प्रमाणित करते हैं। आधिकारिक विश्लेषण के मुताबिक, पंजाब के प्राथमिक स्कूलों में कक्षा तीसरी के छात्रों में भाषा की दक्षता का स्तर बयासी प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी आगे है। इसके साथ ही माध्यमिक स्तर पर कक्षा नौवीं के छात्रों ने गणित जैसे जटिल विषय में बेहतरीन और मजबूत स्कोर हासिल कर राज्य की मजबूत होती बुनियादी शिक्षा का लोहा मनवाया है। पंजाब के सरकारी स्कूलों के छात्र अब न केवल राज्य स्तरीय परीक्षाओं में, बल्कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे साल 2022 से लगातार राज्य के शिक्षा बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया भारी और रणनीतिक निवेश है। राज्य के अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पिछले चार वर्षों में पंजाब के अठासी दशमलव नौ प्रतिशत स्कूलों को हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से पूरी तरह लैस कर दिया गया है, जबकि निन्यानवे दशमलव नौ प्रतिशत स्कूलों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा चुकी है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए इस दौरान तेरह हजार से अधिक नए और योग्य शिक्षकों की भर्तियां की गई हैं। इस बड़े नीतिगत कदम का सीधा सकारात्मक असर स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (प्यूपिल-टीचर रेशियो) में सुधार और समय से पहले पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों की संख्या में आई भारी गिरावट के रूप में देखने को मिल रहा है।

इस बड़ी उपलब्धि के बाद देश के राजनीतिक मोर्चे पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेता पंजाब की इस सफलता को अपनी सरकार की 'शिक्षा क्रांति' की बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं और इसे दिल्ली मॉडल के सफल विस्तार के तौर पर पेश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों और आलोचकों का मानना है कि पंजाब में शैक्षणिक सुधारों की शुरुआत पहले के वर्षों में ही शुरू हो गई थी, लेकिन मौजूदा आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धरातल पर हुए हालिया सुधार बेहद वास्तविक, ठोस और प्रभावी हैं। पंजाब का यह सफल मॉडल यह साबित करता है कि यदि सही राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही दिशा में सरकारी निवेश किया जाए, तो सरकारी स्कूलों की सूरत को पूरी तरह बदला जा सकता है। यह बदलाव आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी स्कूली शिक्षा के विकास का एक नया रोडमैप तैयार करेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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