12वीं के बाद क्यों चुनें BPT (Physiotherapy)? फिजियोथेरेपी है फ्यूचर-प्रूफ करियर, बिना सर्जरी लाएं मुस्कान
शारीरिक दर्द और इंजरी के बढ़ते मामलों के बीच फिजियोथेरेपिस्ट की मांग बढ़ी है, जिसमें छात्र 4.5 साल के कोर्स के बाद शानदार करियर बना सकते हैं।

आजकल की लाइफस्टाइल को देखिये—दिन भर लैपटॉप पर झुककर बैठना, जिम में जोश-जोश में गलत वर्कआउट कर लेना या स्पोर्ट्स के दौरान लगी कोई पुरानी चोट। ये सब बातें अब इतनी कॉमन हो गई हैं कि हर दूसरे घर में कोई न कोई फिजियोथेरेपी की जरूरत महसूस कर रहा है। यही वजह है कि हेल्थकेयर का यह सेक्टर आज के समय में बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है और इसमें करियर बनाना एक बहुत ही स्मार्ट मूव माना जा रहा है। यहां आप सिर्फ एक साधारण जॉब नहीं करते, बल्कि लोगों को बिना दवाइयों और सर्जरी के उनके दर्द से आजादी दिलाकर उनकी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाते हैं, और यही बात इस प्रोफेशन को बाकी करियर से बिल्कुल अलग और रिस्पेक्टफुल बनाती है।
इस फील्ड की सबसे कूल बात यह है कि आप मेडिकल साइंस और फिटनेस के जबरदस्त कॉम्बिनेशन को जीते हैं। पढ़ाई के दौरान आप गहराई से समझते हैं कि हमारा शरीर कैसे काम करता है, हमारी मांसपेशियों और हड्डियों का असल रोल क्या है और किसी बड़ी इंजरी के बाद रिकवरी का प्रोसेस कैसे काम करता है। आपको एक्सरसाइज, मैनुअल थेरेपी और लेटेस्ट इलेक्ट्रोथेरेपी मशीनों के जरिए मरीजों को ठीक करना सिखाया जाता है। अगर आपको बायोलॉजी में इंटरेस्ट है और आप लोगों की हेल्प करके एक अलग लेवल का सैटिस्फैक्शन पाना चाहते हैं, तो यह रास्ता आपके लिए एकदम फिट और स्ट्रॉन्ग साबित हो सकता है।
अब बात करते हैं कि इस जर्नी को शुरू कैसे करना है। इस कोर्स में एंट्री के लिए आपको अपनी 12वीं क्लास फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी यानी PCB के साथ पास करनी होगी, जिसमें ज्यादातर अच्छे कॉलेज 50 से 60 परसेंट मार्क्स की डिमांड करते हैं। एडमिशन का तरीका थोड़ा अलग-अलग हो सकता है—कहीं आपको एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होगा, तो कई प्राइवेट कॉलेज आपके 12वीं के मार्क्स यानी मेरिट के आधार पर भी मौका दे देते हैं। यह पूरा कोर्स लगभग 4.5 साल का होता है, जिसमें 4 साल की थ्योरी और प्रैक्टिकल पढ़ाई के बाद 6 महीने की जरूरी इंटर्नशिप शामिल होती है, जहां आप असली दुनिया के मरीजों को हैंडल करना सीखते हैं।
पढ़ाई के दौरान शुरुआत में आप बेसिक मेडिकल सब्जेक्ट्स पढ़ते हैं, लेकिन जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, आपको ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, स्पोर्ट्स थेरेपी और रिहैबिलिटेशन जैसी एडवांस और इंटरेस्टिंग चीजें सीखने को मिलती हैं। कोर्स पूरा करने के बाद करियर के ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है। आप बड़े हॉस्पिटल्स में फिजियोथेरेपिस्ट बन सकते हैं, स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में एथलीट्स और टीम्स के साथ ट्रैवल कर सकते हैं या फिर अपना खुद का क्लिनिक शुरू कर सकते हैं। अपना खुद का क्लिनिक खोलना इस फील्ड में सबसे ज्यादा पॉपुलर और तगड़ी कमाई वाला ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि यहां आपकी स्किल्स ही आपकी पहचान होती हैं।
सैलरी और ग्रोथ के मामले में भी यह काफी प्रॉमिसिंग है। शुरुआत में आप 15,000 से 30,000 रुपये प्रति माह तक कमा सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे आपका हाथ साफ होता है और एक्सपीरियंस बढ़ता है, यह इनकम 50,000 से 1 लाख रुपये या उससे भी ऊपर जा सकती है। अगर आप मास्टर्स करके किसी खास फील्ड के एक्सपर्ट बन जाते हैं, तो आपकी मार्केट वैल्यू और इनकम दोनों में जबरदस्त उछाल आता है। साथ ही, विदेशों में भी इंडियन फिजियोथेरेपिस्ट्स की बहुत ज्यादा डिमांड है, जो ग्लोबल करियर का सपना देखने वालों के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है।
आने वाले समय में बढ़ती उम्र वाली आबादी और डिजिटल लाइफस्टाइल की वजह से फिजियोथेरेपी की डिमांड और भी बढ़ने वाली है। यह एक ऐसा करियर है जिसमें स्टेबिलिटी के साथ-साथ लोगों का ढेर सारा प्यार और सम्मान भी मिलता है। हालांकि, इसमें आपको काफी मेहनत और पेशेंस रखने की जरूरत होगी, क्योंकि रिकवरी में वक्त लगता है। पर यकीन मानिए, जब आपका कोई मरीज अपने पैरों पर फिर से चलने लगता है या बरसों पुराने दर्द से राहत पाता है, तो वो खुशी किसी भी सैलरी चेक से कहीं ज्यादा बड़ी होती है। इसलिए अगर आप अपनी लाइफ में कुछ मीनिंगफुल करना चाहते हैं, तो ट्रेंड के पीछे मत भागिए और इस फील्ड में अपना डेडिकेशन दिखाने के लिए तैयार हो जाइए।

Pratahkal Bureau
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