नई दिल्ली की संसदीय कार्यवाही के दौरान एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई, जिसने देश के आदिवासी युवाओं के वैश्विक शैक्षणिक अवसरों को नई दिशा देने का संकेत दिया। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने लोकसभा के पटल पर जानकारी देते हुए बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप (एनओएस) योजना के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के मेधावी छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना उन युवाओं के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखते हैं।

मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह केंद्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजना प्रतिवर्ष 20 पात्र अनुसूचित जनजाति छात्रों को लाभ प्रदान करती है। इसके अंतर्गत छात्र मास्टर डिग्री, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल जैसे उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों के लिए विदेश में अध्ययन कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य न केवल शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना है, बल्कि आदिवासी समुदाय के युवाओं को वैश्विक ज्ञान, शोध और नवाचार से जोड़ना भी है।

राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना के तहत पात्रता का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। जिन छात्रों की वार्षिक पारिवारिक आय छह लाख रुपये से कम है, वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता व्यापक है, जिससे छात्रों को विदेश में पढ़ाई के दौरान आर्थिक दबाव का सामना न करना पड़े। इस सहायता में संबंधित विदेशी शैक्षणिक संस्थान की फीस, वीज़ा शुल्क, वार्षिक भरण-पोषण भत्ता, चिकित्सा बीमा, तथा भारत से शैक्षणिक संस्थान के निकटतम स्थान तक और वापस भारत आने के लिए इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा का खर्च शामिल है।

सरकारी बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता वास्तविक खर्च के आधार पर प्रदान की जाती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश पहले से ही निर्धारित हैं, ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और सुव्यवस्थित रहे। मंत्रालय का यह प्रयास यह दर्शाता है कि आदिवासी छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी को राष्ट्रीय विकास के एक अहम स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा में प्रस्तुत यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब वैश्विक स्तर पर शिक्षा, शोध और तकनीकी कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना आदिवासी समुदाय के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। विदेश में अध्ययन से प्राप्त अनुभव और ज्ञान भविष्य में देश के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास में योगदान दे सकता है।

समापन के रूप में, यह योजना न केवल व्यक्तिगत छात्रों के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता रखती है, बल्कि व्यापक रूप से आदिवासी समाज को सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संसद में रखी गई यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसके तहत समावेशी विकास और समान अवसरों को प्राथमिकता दी जा रही है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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