NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 18 जून को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सुरक्षा, पारदर्शिता, राज्यों के समन्वय, अभ्यर्थियों की सुविधाओं और NTA की तैयारियों की समीक्षा की गई। 21 जून को होने वाली परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल होंगे।

देश की सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा से ठीक तीन दिन पहले केंद्र सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार, 18 जून 2026 को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और सुचारू संचालन को लेकर अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब लाखों छात्र 21 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं और पूरे देश की नजरें इस परीक्षा पर टिकी हैं।

नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पदाधिकारियों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य NEET UG पुनर्परीक्षा की तैयारियों का व्यापक आकलन करना और यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक संपन्न हो।

गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित मूल NEET UG परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक और सुरक्षा संबंधी गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इस घटनाक्रम ने देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के बीच चिंता और असंतोष पैदा कर दिया था। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बहाल करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने 21 जून को देशव्यापी पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया।

समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परीक्षा का संचालन पूरी तरह सुरक्षित, निर्बाध और त्रुटिरहित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सामने आई हर कमजोरी को दूर करना अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने, प्रश्नपत्रों के परिवहन और वितरण पर कड़ी नजर रखने तथा साइबर सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने की समीक्षा की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस विभागों के साथ समन्वय को भी प्राथमिकता दी गई ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।

बैठक में राज्यों के साथ समन्वय पर भी विशेष चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्रश्नपत्रों का परिवहन सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से हो, परीक्षा केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनी रहे, यातायात प्रबंधन प्रभावी हो तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सेवाएं उपलब्ध रहें। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल को इस विशाल परीक्षा के सफल आयोजन की प्रमुख आवश्यकता माना गया।

अभ्यर्थियों की सुविधा को भी समीक्षा का अहम हिस्सा बनाया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी परीक्षा केंद्रों पर स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, आवश्यकतानुसार परिवहन सहयोग, निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा को सुरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक अनुकूल और तनावमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना भी है।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं। इनमें परीक्षा समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों को अपनी टेस्ट बुकलेट साथ ले जाने की अनुमति देना भी शामिल है। इसके अलावा परीक्षा पैटर्न और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है ताकि छात्रों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

21 जून को आयोजित होने वाली यह पुनर्परीक्षा दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है। अनुमान है कि इसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा के लिए देश और विदेश के 550 से अधिक शहरों में 5,400 से ज्यादा परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा का आयोजन प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए NTA ने विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की है। हाल के महीनों में परीक्षा को लेकर बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के बीच एजेंसी ने छात्रों से अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि मानसिक रूप से स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरे अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे।

बैठक के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने दोहराया कि परीक्षा की अखंडता और पारदर्शिता किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की नकल या परीक्षा में धांधली के प्रति सरकार की नीति पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि परीक्षा प्रक्रिया का प्रत्येक चरण निष्पक्ष और विश्वसनीय हो।

21 जून 2026 को आयोजित होने वाली NEET UG पुनर्परीक्षा ऑफलाइन यानी पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की जाएगी। हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली में परिवर्तित किया जा सकता है। ऐसे में यह परीक्षा केवल लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता की परीक्षा के रूप में भी देखी जा रही है। 18 जून की समीक्षा बैठक को इसी दिशा में केंद्र सरकार की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण तैयारियों में से एक माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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