नीट पेपर लीक के गम में एमपी की छात्रा आकांक्षा ने नागपुर में की खुदकुशी, 650 नंबर की उम्मीद और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने ली एक और मासूम की जान। पढ़े पूरी खबर

देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) को लेकर मचा देशव्यापी बवाल अब सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि देश के होनहार युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। मध्य प्रदेश की रहने वाली नीट आकांक्षी आकांक्षा की मौत ने इस पूरे परीक्षा घोटाले के उस खौफनाक और संवेदनशील पहलू को उजागर कर दिया है, जो अमूमन सरकारी फाइलों और जांच कमेटियों के पीछे छिप जाता है। नीट यूजी 2026 की तैयारी कर रही आकांक्षा ने बीते 20 मई को नागपुर में आत्महत्या कर ली। उनकी मौत के बाद सामने आए सुसाइड नोट ने न केवल उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि परीक्षा नियामक संस्थाओं की संवेदनशीलता और पूरी शिक्षा प्रणाली पर एक गंभीर और तीखा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

इस दुखद घटनाक्रम की पृष्ठभूमि उस समय तैयार हुई जब बीते 12 मई को परीक्षा से ठीक पहले कथित तौर पर एक 'गेस पेपर' के लीक होने और उसके मूल प्रश्न पत्र से हूबहू मिल जाने के बाद नीट यूजी 2026 की परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया था। मध्य प्रदेश के एक बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली आकांक्षा के सपनों को उड़ान देने के लिए उनके माता-पिता ने भारी आर्थिक तंगी के बावजूद लगभग तीन लाख रुपए का कर्ज लेकर उन्हें कोचिंग के लिए नागपुर भेजा था। आकांक्षा अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थीं और परीक्षा देने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वे लगभग 650 अंक हासिल कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा कर लेंगी। लेकिन परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के इस महाघोटाले ने उनके इन तमाम अरमानों और उम्मीदों को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया, जिससे उपजे मानसिक तनाव को वे सहन नहीं कर सकीं।

विडंबना यह है कि आकांक्षा इस व्यवस्था की शिकार होने वाली अकेली छात्रा नहीं हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद से उपजे भारी अवसाद और अनिश्चितता के कारण अब तक कम से कम पांच अन्य छात्र-छात्राएं अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं। इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने जांच की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है, जो इस लीक के अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कड़ियों को खंगालने में जुटी है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े प्रशासनिक सुधारों और कड़े बदलावों की वकालत की है ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो। इसके साथ ही छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 21 जून को दोबारा परीक्षा (री-टेस्ट) कराने का आधिकारिक फैसला लिया गया है, लेकिन छात्र संगठनों और देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की साख पर लगा दाग धुंधला होता नहीं दिख रहा है।

कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर इस मुद्दे ने इस समय पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। मुख्य विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी सहित कई अन्य शीर्ष विपक्षी नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की बुनियादी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विफलता करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाएं छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। देश के कोने-कोने में छात्र और अभिभावक सड़कों पर उतरकर इस व्यवस्था के खिलाफ जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आकांक्षा की यह दर्दनाक विदाई और उनका सुसाइड नोट इस बात का जीवंत और खौफनाक प्रमाण है कि जब देश की परीक्षा प्रणालियां भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता की भेंट चढ़ती हैं, तो उसकी सबसे बड़ी कीमत किसी नेता या अधिकारी को नहीं, बल्कि एक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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