NEET परीक्षा विवाद पर शशि थरूर का हमला; राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चूक को बताया पूरी पीढ़ी के साथ विश्वासघात
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बार-बार हो रही अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर उठाए गंभीर सवाल।

एक प्रेस वार्ता के दौरान उंगली उठाकर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जिन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
Shashi Tharoor on NEET exam row : भारत की सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) को लेकर उपजा विवाद अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी राजनीतिक और प्रशासनिक संग्राम में तब्दील हो चुका है। देश की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। थरूर ने इन लगातार होने वाली प्रशासनिक चूकों और सुरक्षात्मक विफलता को देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ 'बेशर्म अक्षमता' करार दिया है। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठनों का आक्रोश सड़कों पर ज्वालामुखी बनकर फूट रहा है और पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है।
इस पूरे सियासी और प्रशासनिक ड्रामे के केंद्र में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली स्नातक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा है। समाचार एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत के दौरान शशि थरूर ने परीक्षा प्रणाली की शुचिता पर गहरे सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब एक ऐसी प्रक्रिया चलाई जाती है जहां परीक्षाओं की निष्पक्षता पर से छात्रों का भरोसा ही उठ जाए, तो वह बेहद चिंताजनक स्थिति होती है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों होनहार छात्र सालों तक दिन-रात एक करके परीक्षा की तैयारी में अपना पूरा जीवन झोंक देते हैं, लेकिन अचानक उन्हें पता चलता है कि पूरी प्रक्रिया में लीक, भ्रष्टाचार और बेईमानी का जाल बिछा हुआ है। थरूर ने इस पूरी दूषित प्रक्रिया के कारण बार-बार परीक्षाएं रद्द होने और छात्रों को दोबारा उसी मानसिक प्रताड़ना से गुजरने को पूरी पीढ़ी के साथ एक अक्षम्य विश्वासघात बताया है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य का हवाला देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने भारत के प्रशासनिक तंत्र को कड़े घेरे में लिया। उन्होंने पूछा कि जब दुनिया के तमाम देशों में सैट (SAT), कैम्ब्रिज परीक्षा या आईएससी (ISC) जैसी बड़ी और जटिल प्रतियोगी परीक्षाएं बिना किसी विवाद के पूरी निष्पक्षता और अखंडता के साथ आयोजित की जा सकती हैं, तो भारत सरकार द्वारा संचालित व्यवस्था में ही ऐसी 'लगातार गड़बड़ी' क्यों देखने को मिलती है। थरूर ने केंद्र सरकार से सीधे सवाल किया कि आखिर मंत्रालय और परीक्षा एजेंसियां राष्ट्रीय स्तर की एक बेहद सरल और स्थापित प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में इतनी लाचार क्यों साबित हो रही हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश में बार-बार पैदा होने वाले इस शैक्षणिक संकट के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, संबंधित मंत्रालय और एनटीए की पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
#WATCH | Thiruvananthapuram, Keralam: Congress MP Shashi Tharoor says, "If you run a process where the integrity of the examinations cannot be trusted, where you are in a situation where, tragically, people who have spent so much effort in preparing suddenly find that there are… pic.twitter.com/lAz3juYdwA
— ANI (@ANI) June 2, 2026
इस विवाद के कानूनी और आधिकारिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो स्थिति बेहद गंभीर मोड़ ले चुकी है। आगामी मेडिकल सत्र में दाखिले के लिए ३ मई २०२६ को आयोजित की गई नीट-यूजी २०२६ की परीक्षा को पेपर लीक के पुख्ता आरोपों के मद्देनजर एनटीए द्वारा आधिकारिक तौर पर रद्द करने का फैसला लिया गया था। इस बड़े रैकेट की तह तक जाने के लिए इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा चुकी है। सीबीआई द्वारा की जा रही देशव्यापी तफ्तीश और कई संदिग्धों की धड़ाधड़ गिरफ्तारियों के बीच, अब नीट-यूजी २०२६ की इस पुनर्परीक्षा को २१ जून के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है। कानूनी जांच के इस दौर के बीच लाखों छात्रों के मन में आगामी काउंसलिंग और शैक्षणिक सत्र के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
प्रवेश परीक्षाओं में शुचिता का यह संकट भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अब तक का सबसे कठिन इम्तिहान बन गया है। शशि थरूर ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यह पहली बार नहीं है जब देश का युवा इस तरह की विफलता का शिकार हुआ है, लेकिन इसे आखिरी बार होना ही चाहिए, अन्यथा देश की पूरी शिक्षा प्रणाली पर से दुनिया का भरोसा उठ जाएगा। वर्तमान समय में सीबीआई की चल रही जांच और २१ जून को होने वाली पुनर्परीक्षा की तैयारी के बीच, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस टूटे हुए भरोसे को दोबारा कैसे बहाल करती है, क्योंकि यह केवल एक परीक्षा का सवाल नहीं, बल्कि देश के भविष्य और उसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख की सबसे बड़ी लड़ाई है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
