लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े 10 बड़े सवालों के जवाब, जानिए री-नीट परीक्षा देने से पहले क्या बदला और क्या नहीं?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 21 जून को होने वाले नीट री-एग्जाम के लिए फीस रिफंड प्रक्रिया, नए केंद्र आवंटन नियमों और एडमिट कार्ड पर स्थिति स्पष्ट की।

परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार के बाहर प्रवेश का इंतजार करते नीट उम्मीदवारों की भारी भीड़।
भारत की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के इतिहास में इस वर्ष का घटनाक्रम अभूतपूर्व रहा है। तीन मई को देशव्यापी स्तर पर आयोजित हुई परीक्षा में सामने आए संगठित पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर मामलों के बाद, शिक्षा मंत्रालय को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा था। इस संवेदनशील और तनावपूर्ण पृष्ठभूमि के बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने आगामी इक्कीस जून को आयोजित होने जा रही री-नीट परीक्षा को लेकर अपनी तैयारियां चरम पर पहुंचा दी हैं। इस अचानक बदले घटनाक्रम से देश भर के लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में परीक्षा के नियमों, केंद्र के निर्धारण, माध्यम और पूर्व में जमा किए गए परीक्षा शुल्क को लेकर अनगिनत आशंकाएं और सवाल तैर रहे थे। छात्रों के इसी मनोवैज्ञानिक दबाव और असमंजस को समाप्त करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले दस प्रमुख सवालों के आधिकारिक जवाब अर्थात एफएक्यू जारी कर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, नीट यूजी दोबारा परीक्षा का आयोजन इक्कीस जून को देश भर के विभिन्न शहरों में स्थापित केंद्रों पर एकल पाली में किया जाएगा। परीक्षा का समय दोपहर दो बजे से लेकर शाम पांच बजकर पंद्रह मिनट तक निर्धारित किया गया है, जिसमें परीक्षा से संबंधित अन्य आवश्यक औपचारिकताओं के लिए लगने वाला समय भी पहले से शामिल है। एजेंसी ने छात्रों को सूचित किया है कि री-एग्जाम में सम्मिलित होने के लिए उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार का नया पंजीकरण कराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है और न ही उनसे कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए एजेंसी ने परीक्षार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार दो नए परीक्षा शहरों को चुनने का एक ऑनलाइन विकल्प प्रदान किया है। इसके लिए एनटीए के आधिकारिक पोर्टल पर करेक्शन विंडो सक्रिय कर दी गई है, जो इक्कीस मई तक खुली रहेगी। एजेंसी ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि इस निर्धारित तिथि के बाद वर्तमान पते या शहर के विकल्प में कोई संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा, और आवेदन पत्र जमा करते समय पहले चुना गया परीक्षा का माध्यम यानी भाषा अंतिम माना जाएगा, जिसमें इस चरण में कोई बदलाव संभव नहीं होगा।
छात्रों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने परीक्षा केंद्रों के आवंटन और फीस वापसी पर भी एनटीए ने नीतिगत स्पष्टीकरण दिया है। एनटीए ने दोटूक शब्दों में कहा है कि री-एग्जाम के लिए पुराने परीक्षा केंद्रों को ही दोबारा आवंटित किया जाना अनिवार्य नहीं है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण पूरी तरह से उम्मीदवारों द्वारा चुने गए नए शहर के विकल्पों के आधार पर पूरी तरह रैंडम यानी कंप्यूटरीकृत प्रणाली से पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। वहीं, परीक्षा शुल्क की वापसी को लेकर चिंतित छात्रों को बड़ी राहत देते हुए एजेंसी ने बताया कि रिफंड के लिए बैंक खाते की जानकारी साझा करने का एक विशेष डिजिटल मॉड्यूल इक्कीस मई तक आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिया जाएगा, जिसके माध्यम से छात्र अपनी फीस वापसी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पहचान के कड़े बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, सघन तलाशी और दस्तावेजी औपचारिकताओं को बिना किसी हड़बड़ी के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से इस बार उम्मीदवारों को पंद्रह मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया जा रहा है। एनटीए ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस परीक्षा की तिथि किसी अन्य राष्ट्रीय या क्षेत्रीय परीक्षा से टकराती है, तो भी राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए इक्कीस जून की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड परीक्षा से ठीक पांच दिन पहले यानी चौदह जून को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।
इस व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन के पीछे देश के सबसे बड़े शैक्षिक घोटालों में से एक की कानूनी और आपराधिक जांच चल रही है। तीन मई को हुई मुख्य परीक्षा के रद्द होने के तुरंत बाद सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई द्वारा की गई त्वरित और सघन जांच में इस पूरे रैकेट के पीछे काम करने वाले एक बेहद संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि एनटीए की अत्यंत गोपनीय 'पेपर-सेटिंग' एक्सपर्ट कमेटी के सक्रिय सदस्य रहे प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और एक अन्य वरिष्ठ शिक्षक मनीष मांधरे ही इस पूरे पेपर लीक कांड के मुख्य मास्टरमाइंड हैं। इन आरोपियों ने न केवल परीक्षा के मुख्य प्रश्नपत्र को बल्कि आपातकालीन स्थितियों के लिए अत्यंत सुरक्षित लॉकर में रखे गए रिजर्व सेट के प्रश्नों को भी परीक्षा से पूर्व ही चुरा लिया था, जिसका मिलान बाद में अवैध रूप से बांटे गए गेस पेपर्स से हुबहू हुआ है। वर्तमान में सीबीआई को मुख्य आरोपी मनीष मांधरे की चौदह दिनों की पुलिस कस्टडी मिल चुकी है, जिससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों को भरोसा है कि इस कस्टडी के दौरान होने वाले नए खुलासों से इस आपराधिक सांठगांठ की अंतिम कड़ियों, वित्तीय लेन-देन के स्रोतों और पर्दे के पीछे छिपे अन्य रसूखदार चेहरों को पूरी तरह बेनकाब कर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
