NEET UG 2026 की री-एग्जाम में फिर लगी सेंध; सॉल्वर गैंगके संग MBBS छात्र और 9 आरोपी गिरफ्तार
बिहार के लखीसराय में बायोमीट्रिक जांच के दौरान नामी मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्रों सहित 9 फर्जी परीक्षार्थी और सुरक्षा एजेंसी के 7 कर्मी हिरासत में लिए गए।

बिहार के लखीसराय में रविवार 21 जून को आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम के दौरान केंद्रीय विद्यालय केंद्र के बाहर बायोमीट्रिक और पहचान पत्र विसंगतियों को पकड़ने के लिए कड़ाई से जांच करते अधिकारी।
NEET UG 2026 re-exam cheating in Lakhisarai : देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी 2026' पर लगा विवादों का ग्रहण छटने का नाम नहीं ले रहा है। पेपर लीक के भारी हंगामे के बाद रविवार (21 जून) को कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित की गई पुनरीक्षा (री-एग्जाम) में भी सेंधमारी की गंभीर कोशिश सामने आई है। देश भर के 20 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर होने के बावजूद, शिक्षा माफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। बिहार के लखीसराय में प्रशासन की मुस्तैदी के चलते एक हाईटेक सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जो असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी क्रेडेंशियल्स के सहारे परीक्षा में बैठे थे। पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा परीक्षा केंद्रों पर अनिवार्य रूप से लागू किए गए बायोमीट्रिक सत्यापन के दौरान हुआ। लखीसराय के विभिन्न केंद्रों पर जब परीक्षार्थियों की उंगलियों के निशान और चेहरे का मिलान किया गया, तो तकनीक ने इस बड़े खेल को पकड़ लिया। सुरक्षा घेरे को तोड़कर परीक्षा कक्ष तक पहुंचे इन फर्जी उम्मीदवारों में नामी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) छात्र और पेशेवर डॉक्टर तक शामिल थे, जो मोटी रकम के एवज में दूसरों के भविष्य का सौदा करने आए थे। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के तहत केंद्रीय विद्यालय केंद्र से 7, केआरके हाई स्कूल से 1 और हसनपुर हाई स्कूल से 1 जालसाज को दबोचा गया।
मामले की परतें तब और गहरी हो गईं जब इस जांच का दायरा परीक्षा के तकनीकी तंत्र तक जा पहुंचा। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जिस बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली पर भरोसा किया गया था, उसकी जिम्मेदारी संभालने वाली निजी एजेंसी के 7 कर्मियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। संदेह है कि इन कर्मियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर फर्जी परीक्षार्थियों का प्रवेश संभव नहीं था। पकड़े गए सभी स्कॉलर्स बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों के निवासी हैं, जो एक सुनियोजित अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का हिस्सा बनकर यहां पहुंचे थे।
इस संवेदनशील सुरक्षा चूक के बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार खुद इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। उनके निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) की संयुक्त विशेष टीम गठित की गई है, जो गिरफ्तार आरोपियों और एजेंसी कर्मियों से बंद कमरे में गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस इस सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड और उन असली अभ्यर्थियों तक पहुंचने के लिए छापेमारी कर रही है, जिन्होंने इन शूटरों को परीक्षा में बैठने के लिए लाखों रुपये दिए थे।
नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में दोबारा हुई इस गड़बड़ी ने परीक्षा आयोजकों और सुरक्षा दावों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक तनाव के दौर से गुजरते हुए ईमानदारी से परीक्षा की शुचिता का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सॉल्वर गैंग का यह नया दुस्साहस यह दर्शाता है कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में जड़ें जमा चुका यह माफिया तंत्र कितना गहरा है। लखीसराय की इस कार्रवाई ने भले ही एक बड़े फर्जीवाड़े को रोक दिया हो, लेकिन इसने भविष्य की परीक्षाओं के लिए सुरक्षा और कड़े राष्ट्रीय मानकों की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
