मुरादाबाद के अटल आवासीय विद्यालय में मुफ्त शिक्षा पा रहे श्रमिकों के बच्चे
स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और मुफ्त हॉस्टल-भोजन सुविधाओं के दम पर श्रमिक परिवारों के छात्र आईएएस, डॉक्टर और जज बनने के सपने पूरे कर रहे हैं।

मुरादाबाद के अटल आवासीय विद्यालय की कंप्यूटर प्रयोगशाला में पढ़ाई करते विद्यार्थी।
मजदूरी करके परिवार का पेट पालने वाले श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा हासिल करना अब आसान हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित अटल आवासीय विद्यालय में 718 विद्यार्थी मुफ्त शिक्षा के साथ रहने और खाने की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाओं, हॉस्टल, लाइब्रेरी और खेलकूद की सुविधाओं के बीच पढ़ रहे इन बच्चों के सपनों को नई दिशा मिल रही है। यहां कोई IAS अधिकारी बनना चाहता है, तो कोई सेना में डॉक्टर, जज, शिक्षक या IPS अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर पढ़ाई कर रहा है।
ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर मजदूरी करके परिवार चलाने वाले लोगों के बच्चों के लिए आर्थिक तंगी के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार संसाधनों की कमी के कारण बच्चों के सपने सीमित रह जाते हैं। मुरादाबाद का अटल आवासीय विद्यालय ऐसे ही श्रमिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
विद्यालय में फिलहाल 718 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यहां शिक्षा के साथ रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त है। बेहतर सुविधाओं और अनुकूल माहौल के कारण विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने और भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का अवसर मिल रहा है।
विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों के रहने के लिए हॉस्टल, भोजन के लिए मेस, स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ और खेलकूद के लिए मैदान की व्यवस्था है। बच्चों को मुफ्त किताबें और रहने के लिए जरूरी सामान भी दिया जाता है। आवासीय व्यवस्था होने से विद्यार्थी विद्यालय परिसर में ही रहते हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए नियमित समय और अनुकूल वातावरण मिलता है।
यहां विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थी अंग्रेजी अखबार पढ़ते हुए भी नजर आते हैं, जिससे उनकी भाषा और सामान्य ज्ञान को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रहने, खाने और पढ़ाई की सुविधाएं मुफ्त होने से श्रमिक परिवारों पर बच्चों की शिक्षा का आर्थिक बोझ कम होता है। विद्यालय में सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था भी की जानी है।
विद्यालय की क्षमता को आगे चलकर बढ़ाकर कक्षा 12वीं तक करीब 1,000 विद्यार्थियों को शिक्षा देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अधिक श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
राजेंद्र कुमार IAS, लक्षिता सेना में डॉक्टर और भुवनेश जज बनना चाहती हैं
अटल आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लक्ष्य बताते हैं कि बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलने से उनके भविष्य को लेकर सोच किस तरह बदल रही है। कक्षा आठवीं के विद्यार्थी राजेंद्र कुमार IAS अधिकारी बनना चाहते हैं। वह पहले अपने गांव के माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते थे। उनके मुताबिक, वहां उन्हें वैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं, जैसी अटल आवासीय विद्यालय में मिल रही हैं। यहां बेहतर शिक्षा और रहने-खाने की व्यवस्था मिलने से उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने का अवसर मिला है। राजेंद्र आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अधिकारी बनना चाहते हैं।
कक्षा 11वीं की छात्रा लक्षिता आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और उनके पिता श्रमिक हैं। लक्षिता बताती हैं कि विद्यालय में आने से पहले उन्हें अपने भविष्य को लेकर बहुत स्पष्टता नहीं थी। उन्हें समझ नहीं आता था कि आगे क्या करें और अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंचें। यहां बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वह आगे चलकर सेना में डॉक्टर बनना चाहती हैं।
कक्षा दसवीं की छात्रा ऋतिका चौहान के पिता मजदूरी करते हैं। ऋतिका के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने अच्छे विद्यालय में पढ़ने और बेहतर सुविधाएं पाने का मौका मिलेगा। वह अपनी पढ़ाई पूरी करके आगे चलकर शिक्षक बनना चाहती हैं।
कक्षा 11वीं के विद्यार्थी उदय प्रताप के पिता श्रमिक हैं। उदय बताते हैं कि निजी स्कूलों की फीस अधिक होने के कारण सामान्य आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के लिए वहां बच्चों को पढ़ाना मुश्किल होता है। इसके मुकाबले अटल आवासीय विद्यालय में उन्हें बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं। जानकारी जुटाने के बाद उदय ने ह्यूमैनिटीज विषय चुना है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाना और IAS अधिकारी बनना है।
कक्षा दसवीं की छात्रा भुवनेश के पिता राजमिस्त्री हैं। भुवनेश बताती हैं कि पहले उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य को लेकर चिंता रहती थी। उन्हें लगता था कि आगे की पढ़ाई कैसे पूरी होगी और वह अपने सपनों को कैसे साकार कर पाएंगी। विद्यालय में बेहतर सुविधाएं मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वह आगे चलकर जज बनना चाहती हैं।
कक्षा नौवीं की छात्रा दिव्यांशी पहले गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती थीं। उनके पिता खेती-किसानी का काम करते हैं। दिव्यांशी बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने अच्छे विद्यालय में पढ़ने का मौका मिलेगा। यहां बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएं मिलने से उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। उनका सपना भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अधिकारी बनना है।
बेहतर शिक्षा और सुविधाओं से बच्चों को तैयार कर रहा विद्यालय
विद्यालय के प्रधानाचार्य टी.पी. सिंह के मुताबिक, विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। स्मार्ट क्लासरूम, हॉस्टल, भोजन, स्वच्छ पेयजल, खेलकूद, मुफ्त किताबों और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं जैसी सुविधाओं के माध्यम से बच्चों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यालय का उद्देश्य श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर देना और उन्हें अपने भविष्य के लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार करना है। मुफ्त शिक्षा, आवास और भोजन की सुविधा के साथ यहां पढ़ रहे 718 विद्यार्थियों के लिए IAS, IPS, डॉक्टर, जज और शिक्षक बनने जैसे लक्ष्य अब उनकी शैक्षणिक यात्रा का हिस्सा हैं। आगे चलकर कक्षा 12वीं तक करीब 1,000 विद्यार्थियों को शिक्षा देने की योजना इस पहल के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण है।

Pratahkal Bureau
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