आज के दौर में जब हर कोई बोरिंग डेस्क जॉब और 9-से-5 की भागदौड़ से परेशान है, तब मर्चेंट नेवी एक ऐसी लाइफस्टाइल ऑफर करती है जो किसी सपने से कम नहीं है। ज़रा सोचिए, आप विशाल नीले समंदर के बीच एक आलीशान जहाज पर हैं और दुनिया के अलग-अलग देश घूम रहे हैं, वो भी बिना अपनी जेब से एक रुपया खर्च किए। यह फील्ड उन एडवेंचर के शौकीनों के लिए है जो एक अनुशासित और दमदार पर्सनैलिटी बनाना चाहते हैं। यहाँ न केवल समाज में बड़ी इज्जत है, बल्कि सैलरी पैकेज भी इतना शानदार मिलता है कि आप अपनी उम्र के बाकी युवाओं से कामयाबी की रेस में कहीं आगे निकल जाते हैं। सबसे कूल बात तो यह है कि मर्चेंट नेवी की कमाई अक्सर टैक्स-फ्री होती है, यानी जो भी आपने कमाया वो पूरा का पूरा आपका अपना होता है।

इस रोमांचक दुनिया में कदम रखने के दो सबसे बड़े और पॉपुलर रास्ते हैं—बीएससी नॉटिकल साइंस और बीई मरीन इंजीनियरिंग। अगर आपको बड़े जहाज चलाना और नेविगेशन का जिम्मा संभालना पसंद है, तो 3 साल का बीएससी नॉटिकल साइंस कोर्स आपके लिए बेस्ट साबित होगा। वहीं दूसरी तरफ अगर आप मशीनों के जादूगर हैं और इंजन रूम की बारीकियों को समझना चाहते हैं, तो 4 साल की बीई मरीन इंजीनियरिंग की डिग्री आपको एक प्रोफेशनल इंजीनियर बना देगी। इन कोर्सेस की सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं मिलता, बल्कि आपको असली जहाजों पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लैब वर्क के जरिए प्रोफेशनल काम के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है।

लेकिन रुकिए, इस ग्लैमरस करियर में एंट्री के लिए आपको 12वीं क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स यानी पीसीएम के साथ डटकर पढ़ाई करनी होगी। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स के लिए पीसीएम में कम से कम 60% और इंग्लिश सब्जेक्ट में 50% मार्क्स होना बहुत जरूरी है। पढ़ाई के साथ-साथ आपकी फिजिकल फिटनेस भी टॉप क्लास होनी चाहिए क्योंकि समंदर की लहरों के बीच काम करना कोई आसान बात नहीं है। खासकर आपकी आँखों की रोशनी 6/6 होनी चाहिए और कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्या बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि नेविगेशन में रंगों की सही पहचान बहुत मायने रखती है। यहाँ मेंटल टफनेस और टीम वर्क की बहुत अहमियत है क्योंकि आपकी एक छोटी सी चूक भी जहाज पर भारी पड़ सकती है।

एडमिशन की बात करें तो सबसे सही और प्रोफेशनल तरीका है आईएमयू-सीईटी का एंट्रेंस एग्जाम देना। यह नेशनल लेवल की परीक्षा है जो आपको भारत के बेस्ट सरकारी और प्राइवेट मरीन कॉलेजों जैसे आईएमयू चेन्नई, कोलकाता या मुंबई कैंपस तक पहुँचाती है। इनके अलावा तोलानी मैरीटाइम इंस्टीट्यूट और एंग्लो-ईस्टर्न जैसी एकेडमी भी अपनी बेहतरीन ट्रेनिंग के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। एक बहुत ही स्मार्ट तरीका यह है कि आप स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम्स पर नजर रखें। कई बार मार्सक और एमएससी जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियाँ कोर्स शुरू होने से पहले ही काबिल स्टूडेंट्स को स्पॉन्सरशिप दे देती हैं, जिसका सीधा मतलब है कि आपकी पढ़ाई खत्म होते ही नौकरी पक्की है। बस ध्यान यह रखना है कि आप जिस भी कॉलेज को चुनें, वह डीजी शिपिंग से मान्यता प्राप्त हो।

करियर की शुरुआत एक डेक कैडेट या जूनियर इंजीनियर के तौर पर होती है जहाँ ट्रेनिंग के दौरान ही आपको 30,000 से 60,000 रुपये तक का स्टाइपेंड मिलने लगता है। जैसे-जैसे आप डिपार्टमेंटल एग्जाम्स क्लियर करते हैं और आपका एक्सपीरियंस बढ़ता है, आप कैप्टन या चीफ इंजीनियर के बड़े पद तक पहुँच जाते हैं। इस लेवल पर पहुँचने के बाद महीने की सैलरी 8 लाख से लेकर 15 लाख रुपये तक हो सकती है। जहाँ एक तरफ इस करियर में लंबी छुट्टियाँ और शानदार पैसा है, वहीं दूसरी तरफ कई महीनों तक अपने परिवार से दूर रहना एक बड़ी चुनौती भी है। अगर आप में वो जज्बा है और आप लाइफ में कुछ हटकर करना चाहते हैं, तो मर्चेंट नेवी से बेहतर करियर ऑप्शन कोई और हो ही नहीं सकता।

Updated On
Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story