आजकल के दौर में डॉक्टर्स भी बिना लैब रिपोर्ट्स के एक कदम आगे नहीं बढ़ते, और यहीं से शुरू होता है मेडिकल लैब एक्सपर्ट्स का असली स्वैग। अगर आप भी व्हाइट कोट पहनकर मेडिकल वर्ल्ड में अपनी धाक जमाना चाहते हैं, लेकिन एमबीबीएस जैसी लंबी और थकाऊ पढ़ाई के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते, तो मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी आपके लिए एकदम परफेक्ट वाइब है। इस समय पूरी हेल्थकेयर इंडस्ट्री जिस रॉकेट की रफ़्तार से भाग रही है, उसे देखते हुए लैब टेक्नीशियन की डिमांड कभी कम नहीं होने वाली। यह एक ऐसी जॉब प्रोफाइल है जहाँ आप पर्दे के पीछे रहकर भी लोगों की जान बचाने में सबसे इम्पॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं, क्योंकि सच तो यह है कि बिना आपकी लैब रिपोर्ट के किसी भी बड़े इलाज की शुरुआत मुमकिन ही नहीं है।

इस धांसू करियर की शुरुआत करने के लिए आपको बस अपनी 12वीं क्लास कम से कम 45% से 50% मार्क्स के साथ पास करनी होगी। वैसे तो यह कोर्स खास तौर पर साइंस यानी फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी वाले स्टूडेंट्स के लिए ही डिज़ाइन किया गया है, लेकिन आजकल कई जगह मैथ वाले स्टूडेंट्स को भी इसमें एंट्री का बढ़िया चांस मिल जाता है। अगर आप 10वीं के बाद ही अपना बेस मजबूत करना चाहते हैं, तो 12वीं के तुरंत बाद इस दो साल के डिप्लोमा प्रोग्राम यानी डी-एम-एल-टी में एडमिशन लेकर अपने सपनों की उड़ान भर सकते हैं। इसमें आपको पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और ब्लड एनालिसिस जैसी बहुत ही कूल चीजें एकदम प्रैक्टिकल तरीके से सिखाई जाती हैं, जहाँ फोकस मोटी किताबों वाली थ्योरी से ज्यादा मशीनों के साथ काम करने और रियल-लाइफ टेस्टिंग पर होता है।

एडमिशन का पूरा सीन भी काफी सिंपल और सीधा रखा गया है ताकि आपको ज्यादा टेंशन न हो। अगर आप एम्स, सी-एम-सी वेल्लोर या जिपमेर जैसे टॉप लेवल के सरकारी कॉलेजों का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको बस उनके एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने होंगे, वहीं दूसरी तरफ देश के बहुत से नामी प्राइवेट कॉलेज आपके 12वीं के मार्क्स देखकर सीधा एडमिशन भी दे देते हैं। बस फॉर्म भरते वक्त एक स्मार्ट टिप हमेशा याद रखें कि उसी कॉलेज को चुनें जिसका खुद का हॉस्पिटल हो, ताकि आपको पढ़ाई के साथ-साथ असली वर्क कल्चर और पेशेंट्स को हैंडल करने का असली एक्सपीरियंस मिल सके। इस डिप्लोमा कोर्स की ड्यूरेशन सिर्फ दो साल है, और अगर आपका मन आगे जाकर और बड़ी डिग्री लेने का करे, तो आप तीन साल का बी-एम-एल-टी कोर्स भी कर सकते हैं।

करियर ऑप्शंस की बात करें तो यहाँ जॉब्स की पूरी लाइन लगी हुई है और आपको काम ढूंढने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। कोर्स पूरा करने के बाद आप बड़े सरकारी अस्पतालों, लग्जरी प्राइवेट नर्सिंग होम, टॉप लेवल के डायग्नोस्टिक सेंटर्स या ब्लड बैंक में अपनी जगह बना सकते हैं। अगर आप खुद का बॉस बनना चाहते हैं और किसी के अंडर काम करने का मन नहीं है, तो कुछ साल का जरूरी एक्सपीरियंस और लाइसेंस लेने के बाद आप अपनी खुद की कलेक्शन लैब भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा बड़ी फार्मा कंपनियों और रिसर्च लैब्स में भी लैब मैनेजर्स और क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर्स की हमेशा भारी डिमांड रहती है, जो इसे एक पूरी तरह से मंदी-मुक्त करियर बनाता है।

अब बात करते हैं उस सबसे जरूरी चीज़ की जिसके लिए हम सब इतनी मेहनत करते हैं यानी आपकी सैलरी और लाइफस्टाइल। एक फ्रेशर के तौर पर आप बड़े आराम से 15,000 से 25,000 रुपये प्रति महीने से अपना सफर शुरू कर सकते हैं, जो एक शुरुआत के लिए काफी बढ़िया है। जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस बढ़ता है और आप मॉडर्न मशीनों को हैंडल करने में एक्सपर्ट बन जाते हैं, तो यह सैलरी बहुत जल्द 40,000 से 60,000 रुपये तक पहुँच जाती है। अगर आप इंडिया से बाहर गल्फ कंट्रीज या यूरोप जैसे देशों का रुख करते हैं, तो वहां कमाई के पैकेज और भी ज्यादा जबरदस्त होते हैं। तो अगर आप कम समय में एक रिस्पेक्टेड, स्टेबल और हाई-ग्रोथ वाला करियर चाहते हैं, तो बिना देर किए इस मेडिकल शॉर्टकट वाले रास्ते पर निकल पड़िए।

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Pratahkal Newsroom

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