पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने खान सर और ज्ञान बिंदु इंस्टीट्यूट के बीच जारी विवाद में किसी तीसरे पक्ष की गहरी साजिश होने की आशंका व्यक्त की है।

बिहार के शिक्षा जगत में पिछले कुछ समय से जारी अभूतपूर्व गतिरोध के बीच एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। पटना के चर्चित शिक्षक खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक रोशन आनंद के बीच चल रहे आपसी मतभेदों पर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बेहद सनसनीखेज टिप्पणी की है। अररिया में मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान सांसद ने इस पूरे विवाद के पीछे किसी 'थर्ड पार्टी' यानी तीसरे पक्ष की सोची-समझी साजिश होने की गहरी आशंका प्रकट की है। उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और गौरवमयी छवि को बनाए रखने के लिए छात्रों से हर हाल में संयम, अटूट अनुशासन और पूर्ण शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है। सांसद का मानना है कि बिहार के तेजी से उभरते कोचिंग हब को ध्वस्त करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ छिपे हुए तत्व सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सांसद पप्पू यादव ने देश के शैक्षणिक परिदृश्य में बिहार की बदलती और सुदृढ़ होती स्थिति को आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान समय में देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में बिहार तेजी से अग्रसर हो रहा है और राज्य की करीब चालीस प्रतिशत कोचिंग संस्थाएं राष्ट्रीय व वैश्विक पटल पर अपनी प्रामाणिक पहचान स्थापित कर चुकी हैं। राजस्थान के कोटा और कर्नाटक के बेंगलुरु जैसे स्थापित शिक्षा केंद्रों की तुलना में बिहार का सम्मान और विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है क्योंकि यहां समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय छात्रों को अत्यंत कम लागत में उच्च गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इसी बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ प्रभावशाली कॉरपोरेट समूह और प्रतिद्वंद्वी संस्थान बिहार की इस सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं और सुनियोजित तरीके से यहां की कानून व्यवस्था तथा शैक्षणिक माहौल को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण में शिक्षकों की सामाजिक स्थिति और उनकी गरिमा का समर्थन करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि एक राष्ट्र निर्माता के रूप में शिक्षक का सम्मान ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी और थाती होती है। खान सर की अनूठी शिक्षण शैली और अद्वितीय लोकप्रियता ने देश-विदेश में बिहार की मेधा को एक नई पहचान और वैश्विक गौरव दिलाया है। ठीक इसी प्रकार, रोशन आनंद ने भी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के बीच अटूट विश्वास और भरोसे का एक मजबूत माहौल तैयार किया है। सांसद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जिन बड़े व्यावसायिक समूहों और माफिया तत्वों की महंगी कोचिंग संस्थाएं इन योग्य शिक्षकों के सामने पूरी तरह विफल साबित हो रही थीं, वे इनकी निरंतर बढ़ती लोकप्रियता से अत्यधिक असहज हो चुके थे। इसी व्यावसायिक खुन्नस के कारण दोनों शीर्ष शिक्षकों को आपस में लड़ाकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित करने का यह कुत्सित प्रयास किया गया है।

पप्पू यादव ने इस विवाद को सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से तूल देने वाले डिजिटल क्रिएटर्स, कुछ खास ब्लॉगरों और यूट्यूबरों की गैर-जिम्मेदाराना भूमिका पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सनसनी फैलाने की होड़ में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर शिक्षकों की छवि को खंडित करने का कुप्रयास किया जा रहा है, जिसका सीधा प्रतिकूल मानसिक असर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे मासूम और संवेदनशील छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, मुख्यधारा के कुछ बड़े समाचार चैनलों की संपादन शैली पर भी उन्होंने तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जिन मीडिया समूहों के लिए कल तक खान सर देश के सबसे बड़े रोल मॉडल और आदर्श शिक्षक थे, आज वे ही चैनल किसी अदृश्य दबाव में उन्हें एक बिल्कुल अलग और नकारात्मक पहचान के साथ जनता के सामने परोस रहे हैं, जो शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े कार्टेल और मोनोपॉली की मौजूदगी को साबित करता है।

प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए सांसद ने राज्य में सक्रिय शिक्षा माफियाओं की कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अक्सर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने और अन्य धांधलियों के पीछे यही संगठित शिक्षा माफिया सक्रिय रहते हैं, और अब अपनी कमियों को छिपाने के लिए वे राज्य के ईमानदार और प्रतिभाशाली मार्गदर्शकों को निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने बिहार की समकालीन राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की सुरक्षा कटौती के मुद्दे पर भी अपनी संक्षिप्त राय रखी। पप्पू यादव ने कहा कि सुरक्षा जैसे विशुद्ध तकनीकी और प्रशासनिक विषयों को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देकर जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों को इस समय सुरक्षा विवादों को छोड़कर आम जनता से जुड़े वास्तविक और ज्वलंत आर्थिक मुद्दों जैसे बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, डीजल-पेट्रोल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि आम आदमी को आर्थिक मंदी की मार से बचाया जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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