क्या रिसर्च के बिना अधूरा है नया भारत? जितेंद्र सिंह के इस ऐलान से मची हलचल!
BHU के साथी (SATHI) केंद्र के निरीक्षण में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद जरूरी है। जानें पूरी रिपोर्ट

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के 'साथी' केंद्र में अत्याधुनिक उपकरणों का निरीक्षण करते हुए।
Jitendra Singh BHU visit : इक्कीसवीं सदी के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान सबसे अहम हथियार बन चुके हैं। इसी दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने धर्मनगरी वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अत्याधुनिक विज्ञान केंद्र “साथी” (SATHI) का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान उन्होंने देश की वैज्ञानिक दिशा और दशा पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक देश का रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर जमीनी स्तर पर मजबूत नहीं होगा, तब तक 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना साकार नहीं हो सकता।
विश्वविद्यालय परिसर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से स्थापित इस अंतर-विषयक सुविधा का गहन निरीक्षण करते हुए डॉ. सिंह ने वहां मौजूद अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान कार्यप्रणाली का बारीकी से जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर ए.के. चतुर्वेदी और विश्वविद्यालय के समर्पित शोधकर्ताओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि “साथी-बीएचयू” आज महज एक प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्योग जगत के साथ शैक्षणिक सहयोग का एक बेहद शक्तिशाली राष्ट्रीय महाकेंद्र बनकर उभर चुका है।
भारत के वैज्ञानिक दायरे के हो रहे अभूतपूर्व विस्तार पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च सपोर्ट सिस्टम का एक मजबूत जाल बिछा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार की पहुंच देश के हर युवा वैज्ञानिक और शोधकर्ता तक हो सके। उन्होंने बताया कि “साथी”, FIST और ऐसे ही अन्य फ्लैगशिप कार्यक्रमों के माध्यम से अब विश्वविद्यालयों में स्पेस लैब स्थापित किए जा रहे हैं, जो छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति नई सोच और तकनीकी क्षमता विकसित कर रहे हैं। इस पहल का सीधा और सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं, उभरते स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को मिल रहा है।
लगभग 72 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया बीएचयू का यह “साथी” (सॉफिस्टिकेटेड एनालिटिकल एंड टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट) केंद्र सरकार के इसी विजन का जीता-जागता प्रमाण है। यह एक ऐसी साझा और राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक सुविधा है, जहां स्टार्टअप्स, उद्योगों और शोध संगठनों को विश्वस्तरीय उपकरण तथा तकनीकी विशेषज्ञता एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही है। इस केंद्र की तकनीकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां सुपर रेजोल्यूशन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी, एडवांस NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी, हाई रेजोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन और आइसोटोप एनालिसिस सिस्टम जैसी अत्यंत दुर्लभ और महंगी सुविधाएं मौजूद हैं।
इन अत्याधुनिक मशीनों के बलबूते आज लाइफ साइंस, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर, सेमीकंडक्टर, फूड साइंस और बायोटेक्नोलॉजी जैसे संवेदनशील व भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में विश्वस्तरीय शोध किए जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह केंद्र अब तक 1,100 से अधिक उपयोगकर्ताओं को अपनी बेमिसाल सेवाएं दे चुका है। यहां 30,000 से अधिक नमूनों का सफल परीक्षण किया जा चुका है और लगभग 1,000 युवा शोधकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिसके साथ ही 60 से अधिक अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं।
इस केंद्र की इन्हीं उपलब्धियों और हाल ही में इसे प्राप्त NABL मान्यता की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच यह समन्वय ही नए भारत के आर्थिक और वैज्ञानिक विकास की नींव है। डॉ. जितेंद्र सिंह का यह दौरा और उनका कड़ा संदेश इस बात की आधिकारिक पुष्टि करता है कि भारत अब केवल वैश्विक तकनीक का उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता बनने की राह पर तेजी से दौड़ पड़ा है। विश्वविद्यालयों के भीतर तैयार हो रहा यह मजबूत वैज्ञानिक ढांचा ही अंततः भारत को उभरती तकनीकों और उन्नत अनुसंधान के वैश्विक मंच पर एक अजेय प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
