जामिया मिलिया इस्लामिया: अलीगढ़ से दिल्ली तक का 106 साल का सफर
29 अक्टूबर 1920 को स्थापित इस संस्थान ने आर्थिक संकटों से जूझते हुए 1988 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल किया।

छात्र संघ चुनाव मांग के बीच 1920 में स्थापित जामिया मिलिया इस्लामिया 106 साल पूरे कर रहा है।
दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया इन दिनों छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के कारण चर्चा में है। हालांकि, इस विश्वविद्यालय का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है। 29 अक्टूबर 1920 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थापित इस संस्थान ने आर्थिक संकट से लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने तक का लंबा सफर तय किया है। एक समय ऐसा भी आया, जब आर्थिक मदद बंद होने और प्रमुख लोगों के संस्थान छोड़ने के कारण जामिया का अस्तित्व संकट में पड़ गया था।
जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौर में राष्ट्रीय शिक्षा की अवधारणा और स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुई थी। उर्दू भाषा में जामिया का अर्थ विश्वविद्यालय और मिलिया का अर्थ राष्ट्रीय होता है। शुरुआत में यह भारत के यूनाइटेड प्रोविंस के अलीगढ़ में स्थित एक छोटा संस्थान था, जो आगे चलकर नई दिल्ली में केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ। यहां नर्सरी से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में शोध तक की एकीकृत शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध है।
आर्थिक संकट ने खड़ा किया अस्तित्व का सवाल
जामिया मिलिया इस्लामिया की शुरुआती यात्रा आसान नहीं रही। भारत जब ब्रिटिश शासन से आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था, तब संस्थान ने राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस दौरान इसके कई शिक्षक और विद्यार्थी जेल भी गए।
वर्ष 1922 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। इसके बाद 1924 में तुर्की में खिलाफत व्यवस्था समाप्त होने से जामिया को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर भी असर पड़ा। संस्थान के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया। कुछ लोगों को लगा कि जामिया अपना उद्देश्य पूरा कर चुका है, जबकि दूसरों का मानना था कि असहयोग और खिलाफत आंदोलनों के समाप्त होने के साथ ही संस्था ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है।
खिलाफत से मिलने वाली सीमित आर्थिक सहायता भी बंद हो गई। जब जाने-माने लोगों ने भी संस्थान से दूरी बनानी शुरू कर दी, तब जामिया का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो गया और इसके पूरी तरह बंद होने की आशंका पैदा हो गई।
1925 में अलीगढ़ से दिल्ली स्थानांतरित हुआ जामिया
इस संकट के बीच हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख्वाजा ने महात्मा गांधी के समर्थन से वर्ष 1925 में जामिया को अलीगढ़ से दिल्ली के करोल बाग में स्थानांतरित किया। गांधी ने संस्थान को जारी रखने के लिए सहायता का भरोसा दिया। आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए जामिया ने चरखे और तकली जैसे कामों को भी अपनाया।
इसके बाद संस्थान ने धीरे-धीरे अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार किया। वर्ष 1967 में स्कूल ऑफ सोशल वर्क की स्थापना हुई। वर्ष 1971 में जाकिर हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज की शुरुआत की गई। वर्ष 1978 में सिविल इंजीनियरिंग में बीई पाठ्यक्रम शुरू हुआ। वर्ष 1983 में मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर स्थापित किया गया और वर्ष 1985 में फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना हुई।
1988 में मिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा
जामिया मिलिया इस्लामिया के इतिहास में दिसंबर 1988 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इसी महीने संसद के विशेष अधिनियम के जरिए संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। इसके बाद वर्ष 1989 में फैकल्टी ऑफ लॉ को भी इसमें शामिल किया गया। विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए।
समय के साथ जामिया ने इंजीनियरिंग, कानून, मानविकी, भाषाओं, प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। विश्वविद्यालय में कई फैकल्टी के साथ शोध और अध्ययन के विशेष केंद्र भी विकसित हुए। इनमें एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर और एकेडमी ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज शामिल हैं।
अलीगढ़ से दिल्ली तक 106 वर्षों का सफर
वर्ष 1920 में अलीगढ़ में स्थापित जामिया मिलिया इस्लामिया ने शुरुआती वर्षों में आर्थिक और संस्थागत संकटों का सामना किया। वर्ष 1925 में दिल्ली स्थानांतरण, शिक्षकों का योगदान और ओखला परिसर का विकास इसकी यात्रा के अहम पड़ाव रहे। वर्ष 1962 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला और दिसंबर 1988 में यह केंद्रीय विश्वविद्यालय बना।
29 अक्टूबर 2026 को जामिया मिलिया इस्लामिया अपनी स्थापना के 106 वर्ष पूरे करेगा। आर्थिक संकट के दौर में अस्तित्व बचाने के संघर्ष से लेकर उच्च शिक्षा और शोध के विविध क्षेत्रों में विस्तार तक, इस संस्थान का इतिहास इसके विकास के कई महत्वपूर्ण चरणों को सामने रखता है।

Pratahkal Bureau
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