देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शामिल IIT दिल्ली ने छात्रों की मानसिक सेहत और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर कई अहम बदलाव करने का फैसला किया है। कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने से लेकर शिकायतों की स्वतंत्र सुनवाई और शिक्षकों-कर्मचारियों के व्यवहार में संवेदनशीलता लाने तक कई कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत अतिरिक्त क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर नियुक्त किए जाएंगे। जरूरत के अनुसार विजिटिंग मनोचिकित्सकों की सेवाएं भी ली जाएंगी।

संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की यह पहल अगस्त 2026 में छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद गठित बाहरी जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है। समिति ने अपनी रिपोर्ट संस्थान को सौंप दी है, हालांकि रिपोर्ट को गोपनीय रखने का निर्देश दिया गया है।

छात्रों की समस्याओं और शिकायतों को निष्पक्ष तरीके से सुनने के लिए IIT दिल्ली एक स्वतंत्र Student Grievance Ombudsperson नियुक्त करेगा। इसके माध्यम से छात्रों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और उनके समाधान के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध होगी।

लंबे समय तक छुट्टी पर रहने के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करने वाले छात्रों के लिए भी विशेष सहायता व्यवस्था तैयार की जाएगी। ऐसे विद्यार्थियों को काउंसलिंग, पढ़ाई से संबंधित मार्गदर्शन और दोबारा कैंपस के माहौल में घुलने-मिलने के लिए सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए संस्थान बडी नेटवर्क भी विकसित करेगा, ताकि पढ़ाई पर लौटने वाले छात्रों को आवश्यक सहयोग मिल सके।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों और हॉस्टल स्टाफ के लिए अनिवार्य जागरूकता वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं में सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, बेहतर संवाद कौशल और छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य और नशे से जुड़े कानूनों के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

संस्थान की मौजूदा Mental Health Support System और Wellness Policy की प्रभावशीलता परखने के लिए एक अलग बाहरी समिति गठित की जाएगी। इस समिति में मानसिक स्वास्थ्य के दो वरिष्ठ विशेषज्ञ, एक वेलफेयर प्रोफेशनल और दो छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति कैंपस में उपलब्ध मौजूदा सुविधाओं, आपातकालीन सहायता, आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों तक पहुंच और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करेगी। इसके बाद व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सुझाव दिए जाएंगे।

इन बदलावों की कार्ययोजना बाहरी जांच समिति की सिफारिशों पर विचार करने के लिए गठित आंतरिक समिति ने तैयार की है। संस्थान के अनुसार, सुधारों को लागू करने की योजना 31 अक्टूबर को छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ साझा की गई थी। इसके बाद 3 नवंबर को Student Affairs Council की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई और छात्रों के सुझावों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया।

IIT दिल्ली के इन प्रस्तावित कदमों का उद्देश्य कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को अधिक सुलभ बनाना, छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए स्वतंत्र व्यवस्था विकसित करना और संस्थान के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक माहौल को अधिक सहयोगी, संवेदनशील और सुरक्षित बनाना है।

Pratahkal Bureau

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