हिमाचल प्रदेश: मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 320 सीटें मंजूर
केंद्र सरकार ने राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों के विस्तार के लिए 415 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर किया है।

हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी चिकित्सा की 320 सीटें मंजूर की गईं।
हिमाचल प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र ने राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (PG) चिकित्सा की 320 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी है। इन सीटों के विस्तार के लिए केंद्र सरकार लगभग 415 करोड़ रुपये का अनुदान देगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 24 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की।
इस फैसले से मेडिकल स्नातकों को पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई करने और चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटों के लिए 23 जून 2026 को प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। जेपी नड्डा ने बताया कि 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी।
हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का आवंटन अलग-अलग किया गया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC), शिमला को सबसे अधिक 91 नई पीजी सीटें मिली हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर में 57 और डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, टांडा में 57 सीटें स्वीकृत की गई हैं। मेडिकल कॉलेज, मंडी को 55 सीटें, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नाहन को 32 सीटें और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, चंबा को 28 सीटें आवंटित की गई हैं। इस तरह सभी छह संस्थानों में कुल 320 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत हुई हैं। इनमें शिमला को सर्वाधिक 91 और चंबा को सबसे कम 28 सीटें मिली हैं।
एमबीबीएस पूरा कर चुके डॉक्टरों को पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों के माध्यम से किसी विशेष चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण मिलता है। इन पाठ्यक्रमों से डॉक्टरों के विशेष ज्ञान और कौशल का विकास होता है। नई सीटें बढ़ने से पात्र मेडिकल स्नातकों को हिमाचल प्रदेश में ही पोस्टग्रेजुएट शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल रोग और ऑन्कोलॉजी जैसे चिकित्सा क्षेत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण का विस्तार भी हो सकता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को विशेष चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इसका महत्व खास तौर पर राज्य के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में है, जहां उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इन लाभों की प्राप्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वीकृत सीटें स्थापित होकर कब तक संचालित होने लगती हैं।
हिमाचल प्रदेश के लिए स्वीकृत 320 सीटें चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने की केंद्र सरकार की व्यापक योजना का भी हिस्सा हैं। इस पहल के तहत केंद्र सरकार पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा की 10,000 अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए अनुमानित 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला लगभग 415 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान राज्य में नई पीजी मेडिकल सीटें तैयार करने में सहायता करेगा।
मंजूरी मिलने के बाद जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश सरकार से आवश्यक प्रशासनिक और अन्य औपचारिकताएं बिना देरी पूरी करने का आग्रह किया है। स्वीकृत सीटों को स्थापित करने और संचालन शुरू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करना राज्य सरकार की अगली अहम जिम्मेदारी होगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही मेडिकल स्नातक बढ़ी हुई सीटों का लाभ उठा सकेंगे।

Pratahkal Bureau
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