आजकल की पूरी दुनिया विजुअल्स और स्क्रीन पर ही सिमट गई है। अगर आप इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए कूल पोस्टर्स या ऐप्स के शानदार लुक्स देखकर सोचते हैं कि काश आप भी ऐसा कुछ बना पाते, तो समझ जाइए कि आपके अंदर एक फ्यूचर डिजाइनर छिपा है। ग्राफिक डिजाइनिंग आज के समय का सबसे चिल और हाई-पेइंग करियर है क्योंकि अब हर छोटा-बड़ा ब्रांड ऑनलाइन दिखना चाहता है। इस फील्ड की सबसे धाकड़ बात यह है कि आपको 9-से-5 की बोरिंग डेस्क जॉब के चक्कर में फंसने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर फ्रीलांसिंग कर सकते हैं और घर बैठे डॉलर्स में नोट छाप सकते हैं। जब तक इंटरनेट और विज्ञापनों का दौर रहेगा, तब तक एक क्रिएटिव विजुअलाइजर की डिमांड कभी कम नहीं होने वाली।अगर आपने अभी-अभी 10वीं पास की है या अपने रिजल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं, तो आपके लिए रास्ता एकदम साफ है। इस जादुई दुनिया में एंट्री करने के लिए किसी खास स्ट्रीम यानी साइंस या कॉमर्स की कोई पाबंदी नहीं है। आप 10वीं या 12वीं के तुरंत बाद सीधे 3 से 6 महीने के शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स या फिर 1 साल के प्रोफेशनल डिप्लोमा में एडमिशन लेकर अपनी शानदार जर्नी शुरू कर सकते हैं। जो लोग इसे अपनी लाइफ का बड़ा हिस्सा बनाना चाहते हैं और बहुत गहराई से सीखना चाहते हैं, उनके लिए 3 से 4 साल की 'बैचलर ऑफ डिजाइन' यानी बी.डेस जैसी डिग्री भी एक बेहतरीन ऑप्शन है। बस आपके पास रंगों की थोड़ी समझ और कुछ तूफानी सोचने का जज्बा होना चाहिए क्योंकि इसमें सारा खेल आपकी इमैजिनेशन का है, जिसे फोटोशॉप और इलस्ट्रेटर जैसे सॉफ्टवेयर्स हकीकत में बदल देते हैं।इस फील्ड में एडमिशन लेने का प्रोसेस भी बहुत ही स्मूथ और झंझट-फ्री है। ज़्यादातर प्राइवेट इंस्टीट्यूट और वोकेशनल सेंटर्स जैसे एरिना एनिमेशन या मैक में आपको सीधे आपकी मार्कशीट के बेसिस पर डायरेक्ट एडमिशन मिल जाता है। लेकिन अगर आपका सपना एनआईडी या निफ्ट जैसे इंडिया के टॉप सरकारी कॉलेजों में जाने का है, तो आपको एक एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होगा। कोर्स के दौरान आपको सिर्फ किताबी बातें नहीं रटाई जातीं, बल्कि असल दुनिया के हिसाब से लोगो डिजाइन, टाइपोग्राफी और डिजिटल एड्स बनाना सिखाया जाता है। आप चाहें तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे उडेमी से भी अपनी स्किल्स को पॉलिश करना शुरू कर सकते हैं क्योंकि इस इंडस्ट्री में आपकी डिग्री के कागज से कहीं ज्यादा आपका पोर्टफोलियो यानी आपका पिछला काम मायने रखता है।करियर ऑप्शंस की बात करें तो यहाँ चॉइसेज की कोई कमी नहीं है, आप अपनी पसंद के हिसाब से अपना रास्ता चुन सकते हैं। आप किसी बड़ी एडवरटाइजिंग एजेंसी में ग्राफिक डिजाइनर बन सकते हैं या फिर टेक की दुनिया में कदम रखते हुए यूआई/यूएक्स डिजाइनर बन सकते हैं, जो वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स के लुक्स और यूजर एक्सपीरियंस को डिसाइड करते हैं। इसके अलावा लोगो स्पेशलिस्ट, आर्ट डायरेक्टर और डिजिटल विजुअलाइजर जैसे रोल्स भी हमेशा ट्रेंड में रहते हैं। आजकल तो सरकारी विभाग और बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां भी टैलेंटेड डिजाइनर्स को हाथों-हाथ लेती हैं। कई लोग एआई के आने से घबराते हैं, पर यकीन मानिए एआई सिर्फ एक टूल है, असली क्रिएटिव आइडिया तो हमेशा एक इंसान के दिमाग से ही निकलेगा।अब बात करते हैं उस चीज़ की जिसके लिए हम सब इतनी मेहनत करते हैं यानी पैसा। एक फ्रेशर के तौर पर आप महीने के 20,000 से 35,000 रुपये आराम से कमा सकते हैं। जैसे-जैसे आपका हाथ साफ होता है और आपको 3 से 5 साल का एक्सपीरियंस मिल जाता है, आपका सालाना पैकेज 6 से 10 लाख रुपये तक आसानी से पहुँच सकता है। फ्रीलांसिंग की दुनिया में तो कमाई की कोई लिमिट ही नहीं है, वहाँ आप अपने खुद के बॉस होते हैं। थोड़ी मेहनत और डेडलाइन का प्रेशर जरूर होता है, लेकिन जब आप अपना बनाया हुआ डिजाइन किसी बड़े होर्डिंग या फेमस ब्रांड पर देखते हैं, तो वह प्राउड वाली फीलिंग एकदम नेक्स्ट लेवल होती है। तो अगर आपको रंगों और आकृतियों से खेलना पसंद है, तो फोटोशॉप की इस एक्साइटिंग दुनिया में आपका स्वागत है।

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Pratahkal Newsroom

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