टेलीग्राम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका; 22 जून तक जारी रहेगा बैन!
नीट यूजी री-एग्जाम से पहले आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत ऐप ब्लॉक करने के केंद्र के फैसले को जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने सही ठहराया है।

नई दिल्ली में नीट यूजी री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थाई प्रतिबंध को बरकरार रखने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद समाचार ग्राफिक में अदालत की इमारत और टेलीग्राम ऐप का लोगो।
Delhi High Court Telegram Ban : नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक नीट यूजी (NEET-UG) के री-एग्जाम से ठीक पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की दुनिया से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस बड़े फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसने करोड़ों टेक यूजर्स को हैरत में डाल दिया था। कोर्ट ने टेलीग्राम ऐप पर आगामी 22 जून तक लगे अस्थाई प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। शुक्रवार, 19 जून 2026 को जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि परीक्षा की शुचिता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर सरकार द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम पूरी तरह तर्कसंगत हैं। इस फैसले के बाद अब 22 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा तक देश में टेलीग्राम सेवाओं पर लगी पाबंदी सख्ती से जारी रहेगी।
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले महीने 3 मई को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा से जुड़ी हैं, जहां पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस वक्त नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों और अभिभावकों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद सरकार ने मजबूरन 3 मई की परीक्षा को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया। अब आगामी 22 जून को इस परीक्षा का दोबारा आयोजन होना तय हुआ है। दोबारा परीक्षा में किसी भी तरह की सेंधमारी या तकनीकी दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने खतरे की आशंका को भांपते हुए टेलीग्राम पर 22 जून तक के लिए अस्थाई रोक लगा दी थी, जिसे ऐप प्रबंधन ने अदालत में चुनौती दी थी।
कानूनी और तकनीकी मोर्चे पर यह लड़ाई बेहद दिलचस्प रही, जहां सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। टेलीग्राम की तरफ से दलील दी गई कि सरकार द्वारा उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य सोशल मीडिया ऐप्स बिना किसी रोक-टोक के चल रहे हैं। कंपनी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया और तर्क दिया कि उनका प्लेटफॉर्म खुद आईटी एक्ट के तहत जानकारी के दायरे में नहीं आता है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने कई गोपनीय तकनीकी बिंदु रखे और बताया कि कैसे गलत तत्व इस परीक्षा से पहले ऐप की गोपनीय सेटिंग्स का दुरुपयोग कर सकते हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से यह तीखा सवाल भी किया कि महज कुछ लाख छात्रों की परीक्षा के लिए देश के 15 करोड़ यूजर्स को ऐप इस्तेमाल करने से कैसे रोका जा सकता है, लेकिन अंततः राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा गया।
न्यायालय ने इस मामले के कानूनी पहलुओं को गहराई से परखने के बाद टेलीग्राम के तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस तेजस कारिया ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत जारी किया गया सरकारी आदेश पूरी तरह सोच-समझकर और ठोस आधार पर लिया गया निर्णय है। कोर्ट का मानना है कि पेपर लीक जैसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार के पास पर्याप्त और वाजिब कारण मौजूद थे और कानून के तहत तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। डिजिटल युग में सरकारी नियंत्रण और नागरिक अधिकारों के बीच छिड़ी इस बहस में दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला एक बड़ा नजीर बन गया है, जो यह साबित करता है कि देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं की विश्वसनीयता और छात्रों का भविष्य किसी भी वैश्विक टेक दिग्गज की व्यावसायिक स्वतंत्रता से कहीं अधिक मूल्यवान है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
