10वीं के बाद क्यों चुनें साइबर सिक्योरिटी? इंटरनेट के 'बॉडीगार्ड' बनकर छापें तगड़ा पैसा!
डिजिटल खतरों के बढ़ते दौर में 10वीं पास छात्र शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट और डिप्लोमा के जरिए एथिकल हैकिंग और नेटवर्क सिक्योरिटी में अपना करियर शुरू कर सकते हैं।

डिजिटल सुरक्षा की मांग को देखते हुए छात्र 10वीं के बाद साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेट कोर्स चुन रहे हैं। यह चित्र केवल समझाने के उद्देश्य से AI द्वारा बनाया गया है। Image generated by AI for illustrative purposes.
आज के दौर में जब हमारी पूरी लाइफ ऑनलाइन शिफ्ट हो गई है—चाहे वो फेवरिट मूवीज हों या बैंक बैलेंस—इंटरनेट की दुनिया में खतरों का लेवल भी 'प्रो' हो गया है। हैकर्स और डिजिटल चोरों की फौज हर वक्त डेटा चुराने के जुगाड़ में रहती है, और यहीं से शुरुआत होती है एक ऐसी कूल और डिमांडिंग इंडस्ट्री की जिसे हम साइबर सिक्योरिटी कहते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें कंप्यूटर के पीछे की मिस्ट्री सुलझाना और डेटा को सुरक्षित रखना एक मिशन जैसा लगता है, तो यकीन मानिए यह करियर आपके लिए किसी गेम-चेंजर से कम नहीं है क्योंकि आज हर छोटी-बड़ी कंपनी को ऐसे 'डिजिटल सोल्जर्स' की सख्त जरूरत है जो उनके नेटवर्क को बुलेटप्रूफ बना सकें।सबसे अच्छी बात यह है कि इस हाई-टेक फील्ड में कदम रखने के लिए आपको सालों का लंबा इंतजार करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। अगर आपने अभी अपनी 10वीं की परीक्षा पास की है और आपकी दिलचस्पी कंप्यूटर नेटवर्किंग या कोडिंग में है, तो आप बेसिक सर्टिफिकेशन से ही अपने सफर की शुरुआत कर सकते हैं। वैसे तो 12वीं में साइंस यानी पीसीएम बैकग्राउंड होना करियर में थोड़ा फायदेमंद रहता है, लेकिन अगर आप कॉमर्स या आर्ट्स स्ट्रीम से भी हैं, तब भी बेसिक कंप्यूटर स्किल्स और सही जुनून के साथ आप इस रेस का हिस्सा बन सकते हैं, बस आपके पास वो 'लॉजिकल दिमाग' होना चाहिए जो पहेलियों और कोडिंग की बारीकियों को समझने की हिम्मत रखता हो।जब हम इस कोर्स के स्ट्रक्चर की बात करते हैं, तो यह काफी फ्लेक्सिबल और पूरी तरह प्रैक्टिकल होता है जो बोरिंग थ्योरी के बजाय आपको सीधा काम करना सिखाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार 3 से 6 महीने का शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट ले सकते हैं या फिर एक साल का एडवांस डिप्लोमा करके अपनी स्किल्स को और भी ज्यादा शार्प कर सकते हैं। इस दौरान आपको एथिकल हैकिंग, नेटवर्क सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक और क्रिप्टोग्राफी जैसे धांसू सब्जेक्ट्स सिखाए जाते हैं, जो आपको एक प्रोफेशनल एक्सपर्ट बनाने में मदद करते हैं। आप इसे गूगल, आईबीएम, कोरसेरा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स या फिर एनआईईएलआईटी जैसे सरकारी और आईआईटी दिल्ली जैसे नामी संस्थानों से घर बैठे या ऑफलाइन मोड में भी कर सकते हैं।एडमिशन का प्रोसेस भी बहुत सीधा और आसान रखा गया है ताकि हर टैलेंटेड स्टूडेंट को मौका मिल सके। ज्यादातर संस्थानों में आपको डायरेक्ट एडमिशन मिल जाता है, जबकि कुछ टॉप लेवल के संस्थानों में छोटे-मोटे एंट्रेंस टेस्ट या आपकी मेरिट के आधार पर सीट अलॉट की जाती है। एक बार जब आप इस सर्टिफिकेट को हासिल करके मार्केट में उतरते हैं, तो जॉब्स की लाइन लग जाती है और आप साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट, एथिकल हैकर या नेटवर्क सिक्योरिटी इंजीनियर जैसे धाकड़ रोल्स में बैंकों, बड़ी आईटी कंपनियों और ई-कॉमर्स जायंट्स के साथ काम कर सकते हैं। यहाँ तक कि सरकारी पुलिस साइबर सेल और डिफेंस मिनिस्ट्री में भी आप जैसे टैलेंटेड युवाओं की हर वक्त भारी डिमांड रहती है।कमाई के मामले में भी यह फील्ड काफी तगड़ी है जो आपको शुरुआत से ही एक शानदार लाइफस्टाइल जीने का मौका देती है। एक फ्रेशर के तौर पर आप 3 से 5 लाख रुपये सालाना के पैकेज से शुरुआत कर सकते हैं और जैसे-जैसे आप काम सीखते हैं और एक 'प्रो' बनते जाते हैं, आपकी सैलरी 15 लाख रुपये के पार भी बहुत आराम से जा सकती है। भविष्य की बात करें तो जैसे-जैसे एआई और नई ऐप्स का जाल बढ़ेगा, डेटा सिक्योरिटी का खतरा भी उतना ही बढ़ेगा, जिसका सीधा मतलब है कि आपकी डिमांड कभी कम नहीं होने वाली। हालांकि इस जॉब में कभी-कभी रात में काम करने या अचानक आए खतरे को संभालने का चैलेंज होता है, लेकिन हर दिन कुछ नया सीखने की एक्साइटमेंट इसे कभी बोरिंग नहीं होने देती।

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