क्या अब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया होगी सिर्फ ₹25 में ? जानें क्या है CBSE Revaluation 2026 की बड़ी अपडेट
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर असंतोष के बाद सीबीएसई ने जारी किया ऑनलाइन लिंक, वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन की फीस में की गई भारी कटौती।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा नई दिल्ली में कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए लाइव किया गया आधिकारिक री-इवैल्यूएशन ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म पोर्टल
CBSE re evaluation 2026 online portal : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अपने प्राप्तांकों को लेकर असमंजस और असंतोष का सामना कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है। बोर्ड ने कॉपियों की दोबारा जांच, मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आधिकारिक तौर पर अपना ऑनलाइन पोर्टल लाइव कर दिया है। परिणाम आने के बाद से ही देश भर के छात्र इस प्रक्रिया के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, छात्रों को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि बोर्ड ने इस बार आवेदन के लिए बेहद सीमित समय दिया है, जिसकी अंतिम तिथि 6 जून निर्धारित की गई है। जिन छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मिल चुकी है, वे अब बिना समय गंवाए पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन दर्ज कर सकते हैं।
सुरक्षा के लिहाज से पहचान सत्यापन हुआ अनिवार्य :
इस वर्ष की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीबीएसई ने एक बड़ा और कड़ा नीतिगत बदलाव किया है। इस बार ऑनलाइन आवेदन के दौरान छात्रों के लिए पहचान का सत्यापन कराना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आवेदन पत्र जमा करते समय छात्रों को अपनी विशिष्ट पहचान से जुड़ी सटीक जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। ऐसे छात्र जिनके पास स्वयं का वैध पहचान पत्र मौजूद नहीं है, उन्हें बोर्ड ने एक वैकल्पिक राहत भी प्रदान की है। ऐसे परीक्षार्थी अपने माता-पिता या किसी बेहद करीबी रिश्तेदार के आधिकारिक पहचान पत्र संख्या का उपयोग करके आवेदन की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, इसमें एक सख्त शर्त यह जोड़ी गई है कि फॉर्म में भरा गया छात्र का नाम, जन्मतिथि और जेंडर पूरी तरह से उसी व्यक्ति के आधिकारिक दस्तावेजों से मेल खाना चाहिए, जिनका पहचान नंबर उपयोग में लाया जा रहा है। बोर्ड ने छात्रों को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि से बचने के लिए वे फॉर्म भरने से पहले जारी किए गए सभी नियमों को बारीकी से पढ़ लें।
डिजिटल मूल्यांकन (OSM) पर उठे सवाल और फीस में भारी राहत :
इस साल सीबीएसई की कॉपियों की जांच प्रक्रिया शुरू से ही देश भर में चर्चा और विवादों के केंद्र में रही है। बोर्ड ने इस सत्र में बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का उपयोग किया था, जो कि पूरी तरह से एक डिजिटल व्यवस्था है। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों को कॉपियों की भौतिक प्रतियों के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई डिजिटल उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना होता है। परिणाम आने के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देश भर के सैकड़ों छात्रों ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर अपनी गहरी नाराजगी और शिकायतें दर्ज कराई थीं। कई छात्रों का आरोप था कि उन्हें उनकी उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ ने जारी की गई स्कैन कॉपियों में गंभीर तकनीकी खामियां, धुंधली इमेजेस और सही उत्तरों के मूल्यांकन को नजरअंदाज किए जाने जैसे गंभीर सवाल उठाए थे।
छात्रों के इसी भारी असंतोष और दिलचस्पी को देखते हुए बोर्ड ने इस बार राहत देते हुए अपनी फीस संरचना में भारी कटौती करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसे नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
सेवा का प्रकार | पुरानी फीस (प्रति विषय/प्रश्न) | नई संशोधित फीस (प्रति विषय/प्रश्न) |
उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करना | ₹700 प्रति विषय | ₹100 प्रति विषय |
अंकों का वेरिफिकेशन (Marks Verification) | ₹500 - ₹700 प्रति विषय | ₹100 प्रति विषय |
प्रश्नों का पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) | ₹100 प्रति प्रश्न | ₹25 प्रति प्रश्न |
आवेदन करने से पूर्व छात्रों के लिए जरूरी चेकलिस्ट :
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर री-इवैल्यूएशन का फॉर्म फाइनल सबमिट करने से पहले छात्रों को अपनी प्राप्त स्कैन कॉपी का खुद गहराई से विश्लेषण कर लेना चाहिए। छात्रों को मुख्य रूप से निम्नलिखित चार बिंदुओं की जांच सुनिश्चित करनी होगी:
- अमूल्यांकित उत्तर: छात्र यह अच्छी तरह देख लें कि कॉपी के भीतर लिखे गए सभी उत्तरों पर परीक्षक द्वारा नंबर दिए गए हैं या नहीं।
- छूटे हुए पृष्ठ: उत्तर पुस्तिका का कोई भी ऐसा पन्ना या भाग न रह गया हो, जिसे जांचे बिना छोड़ दिया गया हो।
- अंकों का योग: कॉपी के मुख्य पृष्ठ पर और अंदर दिए गए अंकों के कुल जोड़ (टोटल काउंट) में कोई गणितीय गलती न हुई हो।
- गलत अनदेखी: किसी सही और सटीक लिखे गए उत्तर को परीक्षक द्वारा दुर्भावनापूर्ण या तकनीकी त्रुटिवश पूरी तरह खारिज तो नहीं किया गया है।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर टिका भविष्य :
सीबीएसई द्वारा उठाया गया यह कदम केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने की एक बड़ी जद्दोजहद है। डिजिटल मूल्यांकन (OSM) के दौर में तकनीकी त्रुटियों की वजह से छात्रों के भविष्य पर कोई विपरीत असर न पड़े, इसीलिए इस बार री-इवैल्यूएशन की फीस को न्यूनतम स्तर पर लाया गया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी अपने न्याय के लिए आवेदन कर सकें। 6 जून की समयसीमा समाप्त होने के बाद बोर्ड इन आवेदनों की समीक्षा करेगा, जिसके बाद संशोधित अंतिम परिणाम जारी किए जाएंगे। अब देखना यह होगा कि इस पुनर्मूल्यांकन के बाद कितने छात्रों के अंकों में सुधार होता है और क्या यह डिजिटल मार्किंग सिस्टम के दावों को एक नई दिशा देगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
