12वीं के छात्र सिद्धांत ने संसद के समक्ष पोर्टल क्रैश और गलत मूल्यांकन के सबूत किए पेश; बोर्ड परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिशत गिरकर हुआ 85.2%.

CBSE On Screen Marking flaws : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की साख और लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने देश के सबसे बड़े शैक्षणिक बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पारदर्शिता और आधुनिकता का दावा करते हुए इसी साल फरवरी में शुरू की गई सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सामने आई है। इस पूरे मामले का खुलासा किसी बड़े अधिकारी ने नहीं, बल्कि 12वीं कक्षा के एक छात्र सिद्धांत ने किया है, जिसने सीधे संसद की चौखट पर पहुंचकर इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की गंभीर कमियों को उजागर किया है। इस खुलासे के बाद देश के प्रतिष्ठित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में होने वाले एडमिशंस की दहलीज पर खड़े लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया है।

इस साल १३ मई को परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद से ही छात्रों की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं के धुंधले स्कैन होने, कई उत्तरों को बिना जांचे छोड़ने और मूल्यांकन पोर्टल के बार-बार क्रैश होने की शिकायतें लगातार आ रही थीं। सिद्धांत ने संसद के समक्ष इन सभी तकनीकी खामियों के पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि जिस प्रणाली को पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू किया गया था, वह छात्रों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन गई। इतना ही नहीं, सिद्धांत ने इस डिजिटल मार्किंग के ठेके के आवंटन में वेंडर पक्षपात (Vendor Favoritism) का भी गंभीर मुद्दा उठाया है। इस तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ी को और मजबूती तब मिली, जब सिद्धांत के साथ एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी भी इस मुहिम में शामिल हुए और उन्होंने इस पूरे मूल्यांकन पोर्टल में सुरक्षा खामियों (Security Flaws) को उजागर कर डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर भी बोर्ड को घेरा।

इस तकनीकी विफलता का सीधा और भयावह असर इस साल के परीक्षा परिणामों पर साफ तौर पर देखने को मिला है। साल २०२५ में सीबीएसई 12वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत जहां ८८.४ प्रतिशत था, वहीं इस साल यह गिरकर महज ८५.२ प्रतिशत पर सिमट गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की कुल संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बावजूद न केवल कुल पास प्रतिशत गिरा बल्कि उच्च अंक (High Scorers) हासिल करने वाले मेधावी छात्रों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। उत्तर पुस्तिकाओं के सही तरीके से स्कैन न होने और मूल्यांकनकर्ताओं के सामने पोर्टल क्रैश होने की वजह से हजारों छात्रों के अंकों पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिससे उनके करियर और आगे की पढ़ाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।


इस पूरे मामले की गंभीरता और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अब देश की सर्वोच्च विधायी संस्था ने इसमें सीधा दखल दिया है। एक संसदीय पैनल ने इस पूरे डिजिटल मूल्यांकन घोटाले और इसके दूरगामी प्रभावों की गहन जांच शुरू कर दी है। यह पैनल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि कैसे बिना किसी पुख्ता बैकअप और सुरक्षा ऑडिट के इतनी बड़ी परीक्षा की कॉपियों को ऑनलाइन जांचने का जिम्मा एक गैर-भरोसेमंद वेंडर प्रणाली को सौंप दिया गया। कानूनी और आधिकारिक स्तर पर इस जांच के दायरे में सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों से लेकर तकनीकी वेंडर तक शामिल हैं, जिनसे इस लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये पर जवाब तलब किया जा रहा है।

कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले सामने आया यह विवाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था के डिजिटल बदलावों की तैयारियों की पोल खोलता है। संसद के समक्ष छात्र द्वारा किए गए इस साहसिक खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि बिना पूरी तैयारी और सुरक्षा के किया गया कोई भी डिजिटल प्रयोग छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल सकता है। अब देखना यह होगा कि संसदीय समिति की जांच के बाद सीबीएसई अपनी इन ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ अंकों की नहीं बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य और भरोसे की है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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