लॉन्च होते ही क्रैश हुआ CBSE का पोर्टल; एडमिशन की डेडलाइन से सहमे छात्र
कक्षा 12वीं के अंकों के पुनर्मूल्यांकन के लिए तय डिजिटल पोर्टल के निष्क्रिय होने से कॉलेज दाखिले की तैयारियों के बीच छात्रों की चिंताएं बढ़ीं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का ऑनलाइन वेरिफिकेशन पोर्टल तकनीकी समस्याओं के कारण ठप हो गया है, जिस पर साइट के मेंटेनेंस में होने की सूचना दिखाई दे रही है।
CBSE verification portal technical delay : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के परीक्षा प्रबंधन और तकनीकी तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों की समीक्षा और अंकों के पुनर्मूल्यांकन का बेसब्री से इंतजार कर रहे देश भर के लाखों छात्रों को आज उस समय गहरा झटका लगा, जब बोर्ड का बहुप्रतीक्षित वेरिफिकेशन पोर्टल अपने तय समय पर लॉन्च होने में पूरी तरह विफल साबित हुआ। 1 जून को इस डिजिटल री-इवैल्यूएशन पोर्टल की आधिकारिक शुरुआत होनी थी, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते यह लॉन्चिंग के पहले ही दिन क्रैश हो गया। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में दाखिले की बेहद सख्त और नजदीक आती समय-सीमा (एडमिशन डेडलाइन) के बीच आई इस बड़ी तकनीकी विफलता ने छात्रों और उनके अभिभावकों के भीतर भारी मानसिक तनाव और आक्रोश को जन्म दे दिया है।
इस अभूतपूर्व तकनीकी संकट की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो सीबीएसई ने बीते 13 मई को कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए थे, जिसमें इस वर्ष कुल 85.2 प्रतिशत छात्रों ने सफलता हासिल की है। परिणाम आने के बाद से ही बड़ी संख्या में छात्र अपने अंकों को लेकर असंतुष्ट थे और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की गंभीर विसंगतियों की शिकायत कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि इस बार कॉपियों के जो डिजिटल स्कैन मुहैया कराए गए थे, वे बेहद धुंधले थे और कई कॉपियों में से महत्वपूर्ण पन्ने तक गायब थे। इन पुरानी तकनीकी गड़बड़ियों के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल के समय पर शुरू न होने से छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, क्योंकि पोर्टल के ठप होने से उनका पूरा शैक्षणिक सत्र और उच्च शिक्षा में प्रवेश का सपना दांव पर लग गया है।
इस पूरे प्रशासनिक और तकनीकी मोर्चे पर चौतरफा घिरे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्थिति को संभालने के लिए डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों ने देश भर के छात्रों को आश्वस्त करते हुए वादा किया है कि इस तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द दूर कर पोर्टल को आगामी कुछ ही घंटों में पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, बोर्ड ने इस बार कॉपियों की समीक्षा के लिए तय किए गए शुल्क (रिव्यू फीस) में भी बड़ी कटौती करने का एक आधिकारिक ऐलान किया है। नियमों के तहत यह वैधानिक आश्वासन भी दिया गया है कि यदि री-इवैल्यूएशन की इस पूरी प्रक्रिया के बाद किसी भी छात्र के अंकों में सुधार या बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, तो बोर्ड द्वारा ली गई पूरी समीक्षा फीस सीधे छात्र के खाते में रिफंड (वापस) कर दी जाएगी।
हालांकि, बोर्ड के इन तमाम आश्वासनों के बावजूद शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और आलोचकों ने इस पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत के जानकारों ने कॉपियों के धुंधले स्कैन और अब पोर्टल के ठप होने को लेकर सीधे तौर पर उस बाहरी वेंडर (Vendor) की तकनीकी क्षमता को कटघरे में खड़ा किया है, जिसे इस बेहद संवेदनशील और बड़े राष्ट्रीय स्तर के कार्य का ठेका दिया गया था। आलोचकों का स्पष्ट कहना है कि देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड की इस तरह की विफलता लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह तकनीकी विफलता केवल एक पोर्टल की खराबी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह देश की संपूर्ण डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक बहस का रूप अख्तियार करने जा रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
