आज के दौर में जब हर तरफ टेस्ला, इलेक्ट्रिक स्कूटर्स और हाई-टेक कारों का बोलबाला है, तो ऑटोमोबाइल सेक्टर सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा 'वाइब' बन चुका है। अगर आपको भी गाड़ियों के बोनट के अंदर झांकना, इंजन की आवाज समझना और नई टेक्नोलॉजी को डिकोड करना पसंद है, तो यकीन मानिए आप एक गोल्ड माइन पर बैठे हैं। इस फील्ड में करियर बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको कॉलेज खत्म होने तक का इंतजार नहीं करना पड़ता। यह इंडस्ट्री उन लोगों के लिए जन्नत है जो डेस्क जॉब के बजाय मशीनों के साथ 'रियल' काम करना चाहते हैं। आज जिस तरह से सड़कों पर गाड़ियां बढ़ रही हैं और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का क्रेज आया है, स्किल्ड प्रोफेशनल्स की डिमांड आसमान छू रही है, और यही वो सही वक्त है जब आप इस रेस में सबसे आगे निकल सकते हैं।इस रोमांचक सफर की शुरुआत आप अपनी 10वीं की परीक्षा के तुरंत बाद कर सकते हैं, जिसके लिए आपको बस 45% से 50% मार्क्स की जरूरत होती है। यह 3 साल का एक पावर-पैक प्रोग्राम है जिसे 6 सेमेस्टर्स में बांटा गया है, लेकिन अगर आपने 12वीं PCM से की है तो 'लेटरल एंट्री' के जरिए आप इसे सिर्फ 2 साल में भी पूरा कर सकते हैं। एडमिशन के लिए आपको यूपी के JEECUP या दिल्ली के CET जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स देने होते हैं जिससे आपको टॉप सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज मिल सकते हैं, वरना कई प्राइवेट इंस्टिट्यूट्स डायरेक्ट एडमिशन का ऑप्शन भी देते हैं। शुरुआत में आपको मैथ और फिजिक्स जैसे बेसिक सब्जेक्ट्स के साथ चेसिस डिजाइन और इंजन मैकेनिज्म सिखाया जाता है, लेकिन असली मजा लैब और वर्कशॉप में आता है जहां आप खुद अपने हाथों से इंजन खोलना और जोड़ना सीखते हैं।एक बार जब आप इस कोर्स को पूरा कर लेते हैं, तो आपके पास टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों में जूनियर इंजीनियर या क्वालिटी कंट्रोलर बनने का शानदार मौका होता है। करियर की शुरुआत भले ही ₹15,000 से ₹25,000 के शुरुआती वेतन से हो, लेकिन जैसे ही आप 2-3 साल का एक्सपीरियंस बटोर लेते हैं, आपकी सैलरी ₹60,000 प्रति माह तक जा सकती है। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों जैसे रेलवे और डिफेंस में भी आपके लिए दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। और अगर आप किसी के अंडर काम नहीं करना चाहते, तो खुद का गैराज या ऑटो-कस्टमाइजेशन बिजनेस शुरू करना एक बहुत ही प्रॉफिटेबल ऑप्शन है क्योंकि गाड़ियां तो हमेशा सड़कों पर रहेंगी ही, बस उनका फ्यूल बदल जाएगा।भविष्य की बात करें तो अगले 10-20 साल पूरी तरह से स्मार्ट कारों और बैटरी टेक्नोलॉजी के होने वाले हैं। इसका मतलब है कि आपको सिर्फ पुराने इंजन ही नहीं, बल्कि फ्यूचरिस्टिक हाइब्रिड सिस्टम्स पर भी काम करने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह फील्ड उनके लिए नहीं है जो सिर्फ एयर-कंडीशन्ड ऑफिस में बैठना चाहते हैं, क्योंकि यहां आपको वर्कशॉप की गर्मी और शोर के बीच रहकर मशीनों से दोस्ती करनी होगी। लेकिन अगर आपमें प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स हैं और आप नई तकनीक को लेकर क्रेजी हैं, तो यह चैलेंज आपके लिए रोमांच बन जाएगा। अंत में बस यही सलाह है कि किताबी कीड़ा बनने के बजाय अपनी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर सबसे ज्यादा फोकस करें क्योंकि इस इंडस्ट्री में डिग्री सिर्फ एंट्री दिलाती है, लेकिन आपकी तरक्की आपका हुनर तय करता है।

Updated On
Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story