अमेरिका में परीक्षा के दौरान न इनविजिलेटर की मौजूदगी, न फोन की जांच और न ही इंटरनेट जैमर, इसके बावजूद छात्र नियमों का पालन करते हैं। अमेरिका में पढ़ाई कर रही भारतीय छात्रा ताविशी जातरेले ने वहां की परीक्षा व्यवस्था का अपना अनुभव साझा किया है। उनके अनुभव ने भारत और अमेरिका के बीच परीक्षा आयोजित करने के तरीकों और अकादमिक ईमानदारी को लेकर अंतर की ओर ध्यान खींचा है।

भारत में परीक्षा केंद्रों पर आमतौर पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। परीक्षा कक्ष में दो से तीन शिक्षक निरीक्षण करते हैं, विद्यार्थी शांत माहौल में सवालों के जवाब लिखते हैं और नकल रोकने के लिए जांच की जाती है। ऐसे में अमेरिका की परीक्षा व्यवस्था को लेकर यह सवाल उठता है कि वहां बिना सख्त निगरानी के परीक्षाएं किस तरह आयोजित की जाती हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पढ़ाई कर रही भारतीय छात्रा ताविशी जातरेले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अमेरिका आए दो महीने हो चुके हैं और वहां परीक्षा के दौरान देखने को मिला भरोसे का स्तर उन्हें काफी प्रभावित करने वाला लगा।

ताविशी ने कहा, 'मुझे अमेरिका आए 2 महीने हो गए हैं और यहां की जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान किया, वह है एग्जाम के नियम और ईमानदारी। यहां कोई इनविजिलेटर (निरीक्षक) नहीं होता, 'ओपन बुक' एग्जाम होते हैं, न तो फोन की चेकिंग होती है और न ही इंटरनेट जैमर लगे होते हैं। फिर भी कोई फोन का इस्तेमाल नहीं करता और न ही चीटिंग करता है। भारत में गलाकाट प्रतिस्पर्धा की वजह से ऐसा भरोसा देखने को नहीं मिलता है।'

छात्रा की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इस बात से सहमति जताई कि अमेरिका में परीक्षा व्यवस्था में हर चीज को भारत की तरह सख्ती से नियंत्रित नहीं किया जाता। वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि परीक्षा के तरीके अलग-अलग विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों के अनुसार बदल सकते हैं।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में परीक्षा के नियम और तरीके संस्थान तथा कोर्स के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। वहां ओपन-बुक परीक्षा, टेक-होम असाइनमेंट और ऑनलाइन टेस्ट जैसे विकल्पों के जरिए भी विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाता है। इस तरह की परीक्षाओं में विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से कक्षा में बैठकर परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से हर परीक्षा के दौरान परीक्षा कक्ष में शिक्षक की मौजूदगी भी आवश्यक नहीं होती।

हालांकि, अमेरिका में सभी परीक्षाएं बिना निगरानी के नहीं होतीं। कुछ पाठ्यक्रमों में परीक्षाएं सीधे कक्षा में आयोजित की जाती हैं, जहां बाकायदा इनविजिलेटर यानी निरीक्षक मौजूद रहते हैं। ऐसी परीक्षाओं में फोन, इंटरनेट और किसी भी तरह की बाहरी मदद के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू होते हैं।

परीक्षा में ईमानदारी बनाए रखने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की अपनी नीतियां होती हैं। यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा में नकल करते या किसी अन्य तरह की अनुशासनहीनता करते हुए दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई का स्वरूप संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों और गलती की गंभीरता पर निर्भर करता है।

ताविशी जातरेले का अनुभव अमेरिका में परीक्षा व्यवस्था की एक झलक पेश करता है, लेकिन इसे वहां के सभी विश्वविद्यालयों की एक समान प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। किसी परीक्षा में इनविजिलेटर का नहीं होना यह साबित नहीं करता कि सभी अमेरिकी संस्थान विद्यार्थियों की निगरानी के लिए एक ही तरीका अपनाते हैं। परीक्षा के स्वरूप, संस्थान की नीतियों और अकादमिक ईमानदारी से जुड़े नियमों के आधार पर व्यवस्था अलग हो सकती है।

Pratahkal Bureau

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