डूंगरपुर। वागड़ अंचल इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आस्था के रंग में सराबोर है। श्री जैन श्वेताम्बर वीशा पोरवाड़ संघ एवं हुम्मड संघ के संयुक्त तत्वावधान में साध्वी दक्षयशा श्रीजी की पावन निश्रा में आयोजित तीन दिवसीय पौष दशमी महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को घाटी स्थित श्री गंभीरा पाश्र्वनाथ मंदिर में भगवान पाश्र्वनाथ का जन्म कल्याणक भव्य और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और जयकारों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल लाभार्थी मेहता मोहित–सूरजमल परिवार के सानिध्य में भगवान के दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक, फूल पूजा और केसर पूजा से हुई। इसके पश्चात डॉ. कल्पेश–भोगीलाल परिवार के सानिध्य में विधिविधान से आरती संपन्न कराई गई। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रभु के जन्म कल्याणक का पुण्य स्मरण करते हुए आराधना की और जिनालय में श्रीजी की प्रतिमा का मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में घाटी स्थित श्री गंभीरा पाश्र्वनाथ मंदिर से भगवान की भव्य पालकी निकाली गई। पालकी फौज का बड़ला, सर्राफा बाजार, कानेरा पोल, मोची बाजार और धनलक्ष्मी मार्केट होते हुए पुराना अस्पताल परिसर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा, भक्ति गीतों और जयकारों के बीच प्रभु भक्त झूमते नजर आए। इसके पश्चात पालकी कंसारा चौक, सोनिया चौक, घुमटा बाजार और माणक चौक से गुजरते हुए पुनः मंदिर स्थल पहुंची। पूरे मार्ग में धर्मप्रेमियों ने पालकी की आगवानी कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

मंदिर परिसर में स्नात्र पूजा का आयोजन किया गया, जहां आरती और मंगल दीपक उतारे गए। श्रद्धालुओं ने चेत्यवंदन और आराधना कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने खीर का एकाशना भी किया। वहीं जैन सोसायटी स्थित संभवनाथ उपाश्रय में स्थिरता कर रही साध्वी दक्षयशा श्रीजी के सानिध्य में भी पाश्र्वनाथ भगवान की पालकी निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर पहुंची। कार्यक्रम में समाज के महिला, पुरुष और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

इसी क्रम में पूरे वागड़ अंचल में भी जन्म कल्याणक महोत्सव की धूम देखने को मिली। आसपुर, बडौदा, बनकोड़ा और पूंजपुर में अमिझरा पाश्र्वनाथ दादा के जन्म कल्याणक के अवसर पर तीन दिवसीय पौष दशमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस दौरान अमिझरा पाश्र्वनाथ दादा के दरबार को आकर्षक रोशनी और पुष्पों से सजाया गया। मूलनायक भगवान के जयकारों के बीच दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक, केसर पूजा और फूल पूजा विधिविधान से संपन्न हुई। मंदिर से आसपुर के विभिन्न मार्गों से गाजे-बाजे के साथ भव्य वरघोड़ा निकाला गया, जिसमें संघ सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी शामिल हुए। मार्ग में श्रद्धालुओं ने गरबा रास कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वरघोड़ा पुनः मंदिर पहुंचने पर संध्या समय 108 दीपकों की महाआरती और भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पौष दशमी महोत्सव के तहत आयोजित इन आयोजनों ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि समाज में एकता, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी दिया। भगवान पाश्र्वनाथ के जन्म कल्याणक पर आयोजित ये कार्यक्रम वागड़ अंचल के धार्मिक इतिहास में एक और स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गए।

Pratahkal Bureau

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