डूंगरपुर में गूंजी मानवता की आवाज: साधु वासवानी की 60वीं पुण्यतिथि पर बच्चों ने कलम से उकेरा सेवा का आदर्श
डूंगरपुर में साधु वासवानी की 60वीं पुण्यतिथि पर सिंधी भाषा अधिगम केंद्र में भव्य निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। कोमल भावनानी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मुकेश आडवानी, अशोक कालरा और डॉ. प्रदीप गेहानी ने बच्चों को सिंधी संस्कृति व साधु वासवानी के मानवतावादी कार्यों से अवगत कराया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

डूंगरपुर। शिक्षा की नगरी डूंगरपुर में मानवता के मसीहा और महान समाज सुधारक साधु वासवानी की 60वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर सिंधी समाज की नई पीढ़ी ने अपनी लेखनी के माध्यम से जीव दया और नारी शिक्षा के संकल्प को दोहराया। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) तथा भारतीय सिंधु सभा राजस्थान न्यास, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में संचालित सिंधी भाषा अधिगम केंद्र में 16 जनवरी को एक भव्य निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसने शहर के बौद्धिक वातावरण में नई ऊर्जा भर दी।
कार्यक्रम का आगाज साधु वासवानी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं ने साधु वासवानी के जीवन दर्शन, विशेषकर उनके द्वारा शुरू किए गए 'मीरा आंदोलन' और नारी सशक्तीकरण की दिशा में किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर अपने विचार साझा किए। इस बौद्धिक संगम में कोमल भावनानी ने अपनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति के दम पर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं, योगिता भावनानी ने द्वितीय और तनुजा आडवानी ने तृतीय स्थान प्राप्त कर संस्थान का गौरव बढ़ाया। विजयी प्रतिभागियों को सिंधी शिक्षा मित्र मुकेश आडवानी द्वारा पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर शिक्षा मित्र मुकेश आडवानी ने बच्चों को संबोधित करते हुए साधु वासवानी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे वासवानी जी ने सखी संगति, शिक्षा, मानवतावादी सेवा और जीव दया के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किए। उनकी लिखी पुस्तकें और उनके द्वारा स्थापित आदर्श आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। समाज के अध्यक्ष अशोक कालरा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सिंधी सभ्यता और गौरवशाली संस्कृति के संरक्षण से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है।
आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए जोधपुर से आए संयोजक सदस्य डॉ. प्रदीप गेहानी ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। यह कार्यक्रम केवल एक प्रतियोगिता मात्र नहीं था, बल्कि डूंगरपुर की धरती से जीव मात्र के प्रति करुणा और शिक्षा की मशाल को आगे ले जाने का एक सशक्त प्रयास सिद्ध हुआ, जिसने समाज में गहरा सकारात्मक प्रभाव छोड़ा है।

Pratahkal Bureau
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