तीन दिवसीय तप का पुण्यपूर्ण समापन, 150 तपस्वियों का श्रद्धा व विधि-विधान से हुआ पारणा
डूंगरपुर में श्री जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में पार्श्वनाथ भगवान के जन्म व मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर तीन दिवसीय तप का समापन श्रद्धा के साथ हुआ। साध्वी दक्षयशा श्रीजी के सानिध्य में 150 तपस्वियों, जिनमें अनेक बच्चे भी शामिल थे, का विधिवत पारणा कराया गया।

धर्म, तप और आस्था की त्रिवेणी का सजीव दर्शन मंगलवार को डूंगरपुर में उस समय देखने को मिला, जब श्री जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में आयोजित पार्श्वनाथ भगवान के जन्म एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव का तीन दिवसीय तपस्वी कार्यक्रम श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। घाटी स्थित पार्श्वनाथ मंदिर, नेमीनाथ मंदिर तथा संभवनाथ जिनालय में साध्वी दक्षयशा श्रीजी आदि ठाणा के सानिध्य में तपस्वियों का पारणा कराया गया, जिसमें जिले भर से आए लगभग 150 श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार प्रातः जैन सोसाइटी स्थित संभवनाथ उपाश्रय में तपस्वियों को मांगलिक सुनाया गया। इस अवसर पर साध्वी दक्षयशा श्रीजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में धर्म और संस्कारों का बीजारोपण बचपन से ही किया जाना चाहिए, ताकि वे किताबी ज्ञान के साथ-साथ धार्मिक मूल्यों को भी अपने जीवन में आत्मसात कर सकें। उन्होंने कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा से ही भावी पीढ़ी सशक्त और नैतिक बनती है। साध्वी श्रीजी ने इस अवसर पर बच्चों सहित सभी बड़े तपस्वियों को संयम और सदाचार के संकल्प लेने का आह्वान भी किया।
गौरतलब है कि इस तीन दिवसीय तप में करीब एक दर्जन से अधिक छोटे बच्चों ने भी भाग लेकर तपस्या की, जो कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही। इसके पश्चात संभवनाथ वाटिका में लाभार्थी परिवार रोहित चेतनलाल सरैया द्वारा तपस्वियों का बहुमान किया गया तथा विधिवत पारणा संपन्न कराया गया। पारणा के दौरान संपूर्ण वातावरण भक्ति, साधना और उल्लास से ओतप्रोत नजर आया।
कार्यक्रम में हूमड़ संघ के अध्यक्ष पूरणमल दावड़ा, नवयुवक मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुबोध सरैया, श्रेणिक दावड़ा, गौरव कोठारी, महेश दावड़ा, अशोक दोषी सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे। संध्या काल में साध्वी संघ द्वारा विहार किया गया, जिससे धार्मिक वातावरण और अधिक आध्यात्मिक हो उठा।
तीन दिवसीय तप का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में संस्कार, संयम और तपस्या के मूल्यों को सुदृढ़ करने का सशक्त संदेश भी दे गया।
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Pratahkal Bureau
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