सामाजिक समरसत्ता बिगाड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन करे कड़ी कार्यवाही; राजस्थान आदिवासी संघ की पत्रकार वार्ता में 28 सूत्रीय मांग को किया ज़ारी।


युवाओं की भूमिका और आर्थिक संबल

"समाज में बढ़ते सामाजिक एवं वैवाहिक खर्चों को जबतक रोका नहीं जाएगा तब तक समाज को आर्थिक रूप से संबल नहीं बनाया जा सकता ओर इसके लिए समाज के युवाओं को ऐसे सामाजिक हित के कार्यों बढ़चढ़ कर अपनी भूमिका को निभाना होगा तभी हर क्षेत्र में हम प्रगति के सकेंगे।"

यह बात राजस्थान आदिवासी संघ द्वारा बुधवार को डाक बंगले में आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के प्रदेश एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों के कही।

उपस्थित पदाधिकारी

  • प्रदेश अध्यक्ष: भूपत सिंह
  • प्रदेश उपाध्यक्ष: सुखलाल अहारी
  • जिला अध्यक्ष: मुकेश अहारी
  • महा सचिव: धनपाल तबियाढ
  • उपाध्यक्ष: नारायण भोरैया
  • ब्लॉक अध्यक्ष: रूपलाल वरहात

सामाजिक सुधार हेतु 28 सूत्रीय मांग और निर्णय

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष अहारी ने कहा कि हालही में प्रदेश स्तर के सम्मेलन में 28 सूत्री सामाजिक सुधार के बिंदुओं पर गमेती, मेट, कोतवाल सहित बड़ी संख्या में उपस्थित समाज जनों ने एक स्वर में शादी ब्या में बढ़ते खर्चों पर चिंता जताते हुए उसे कम करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाने की वकालत की।

शादी समारोह के लिए सर्व सम्मति से निम्नलिखित सीमा तय की गई:

  • शादी ब्या में 30 तोला चाँदी और सोने का एक काटा।
  • दुल्हन के कपड़ों के लिए 15 हजार नगद सीमा तय।

"ताकि किसी भी कमजोर परिवार को आर्थिक विषमताओं का सामना न करना पड़े। साथ ही उसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी भी दी।"

कुरीतियों पर प्रहार

साथ ही शादी ब्या में जो डीजे व अन्य कुरीतियों को प्रचलन बढ़ रहा है उसे बंद करने का निर्णय ले लिया तथा शराब के बढ़ते चलन पर खासी चिंता जताई। साथ ही जन्म दिवस मनाने के नाम पर खर्चों रोकने का निर्णय लिया गया।

कानून व्यवस्था और समाज कंटकों पर चेतावनी

पत्रकार वार्ता में वर्तमान में जो कुछ युवाओं द्वारा रास्ते रोक कर लूटपाट करना, पथराव, चोरी जैसे सोहार्द बिगाड़ने वाले समाज कंटकों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्यवाही करें।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा के क्षेत्र मे युवाओं मे जागृति आयें ताकि वह अपना भविष्य सवार सके क्योंकि आज का युवा महंगी बाइकों के जरिए स्टंट कर आयें दिन न केवल राहगीरों को अपितु स्वयं भी मौत का कारण बनते है और इन्हीं महंगे शौक को पूरा करने के लिए चोरियों व लूटपाट जैसे वारदातों को अंजाम देते हैं।

संगठन का इतिहास और उद्देश्य

संघ ने कहां की कुछ समाज कंटकों द्वारा जो विषैली बातों के जरिए समाज में खाईं पैदा करने की कार्यवाही की जा रही है, उसका विरोध करते हुए ऐसे तत्वों के खिलाफ भी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

"यह संगठन पूर्ण रूप से गैर राजनीति के और पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी द्वारा वर्ष 1967 की स्थापना की गई थी ताकि आदिवासी समाज को मुख्य धारा में जोड़ा जा सके और तभी से यह संगठन समाज सुधार की दिशा मे कार्य कर रहा है।"

Pratahkal Newsroom

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