डूंगरपुर में निजी बस संचालकों की ललकार: थमेगी पहियों की रफ्तार? मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा 14 सूत्रीय मांग पत्र
डूंगरपुर में वागड़ बस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष वल्लभराम पाटीदार के नेतृत्व में निजी बस संचालकों ने टैक्स माफी, किराया वृद्धि और पड़ोसी राज्यों के समान सुविधाओं की मांग की है। जानें क्या हैं मुख्य मांगें और बजट से ऑपरेटर्स को क्या उम्मीदें हैं।

डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर जिले में निजी बस संचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वागड़ बस एसोसिएशन के बैनर तले आज निजी ऑपरेटरों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक व्यापक ज्ञापन सौंपा, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर आगामी बजट में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो परिवहन व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। वागड़ बस एसोसिएशन के अध्यक्ष वल्लभराम पाटीदार के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने परिवहन क्षेत्र में आ रही व्यवहारिक और आर्थिक विसंगतियों को दूर करने की पुरजोर वकालत की है।
एसोसिएशन के सचिव रतनसिंह डाबी ने मांगों का ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि निजी बस संचालक लंबे समय से पड़ोसी राज्यों के समान कर ढांचे की मांग कर रहे हैं। ज्ञापन में प्रमुख रूप से चुनावों के दौरान अधिग्रहित की जाने वाली निजी बसों का किराया पड़ोसी राज्यों के बराबर करने और उस अवधि का वाहन टैक्स माफ करने की मांग उठाई गई है। इसके साथ ही नेशनल हाईवे पर अन्य मार्ग की बसों को ओवरलैप में दी जाने वाली छूट को 25 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने की आवश्यकता जताई गई है ताकि ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
कानूनी और तकनीकी जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए संघ ने लोक परिवहन सेवा के टैक्स को टीएसआरटीसी की तर्ज पर ग्रामीण मार्गों के लिए पूरी तरह माफ करने की मांग की है। निजी ऑपरेटरों का कहना है कि स्लीपर कोच और टूरिस्ट बसों पर लगने वाला टैक्स भी पड़ोसी राज्यों की भांति 200 रुपये प्रति सीट के स्तर पर लाया जाना चाहिए। साथ ही, टीपी की वैधता 24 घंटे करने और सिटी बसों को प्रतिमाह 5 टीपी की अनुमति देने जैसे प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया गया है। एक महत्वपूर्ण मांग यह भी रही कि सरकार द्वारा सीनियर सिटीजन और महिलाओं को किराए में दी जाने वाली छूट को निजी बसों में भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, लेकिन इसका वित्तीय समायोजन राजस्थान रोडवेज की तर्ज पर टैक्स माफी के माध्यम से किया जाए।
इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया के दौरान निजी बस मालिकों ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष अनिल मेहता, शैलेश मेहता, धनपाल रोत, शिवराज सिंह, दिनेश कटारा और देवीलाल रोत सहित बड़ी संख्या में बस ऑपरेटर उपस्थित रहे। संचालकों ने स्पष्ट किया कि लगेज बसों से करियर हटाने की कार्रवाई बंद की जाए और एमएनएसटी योजना को पुन: लागू कर उन्हें राहत दी जाए। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के आगामी बजट पर टिकी हैं, जहां इन मांगों पर होने वाला निर्णय डूंगरपुर सहित पूरे वागड़ क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था की भविष्य की दिशा तय करेगा।

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