डूंगरपुर के घाटी दरवाजे टहलता लेपर्ड, और नीचे से गुजरते बेखबर बाइक सवार
घाटी दरवाजे के नीचे से गुजरते समय कई बाइक सवार और पैदल लोग रास्ता पार कर रहे थे। लोगों ने सुरक्षा के लिए चिल्लाते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी।

डूंगरपुर। रविवार की देर शाम शहर के घाटी मोहल्ले के पुराने घाटी दरवाजे पर एक लेपर्ड देखा गया, जिसने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बीच खलबली मचा दी। लेपर्ड दरवाजे पर खड़ा था, जबकि नीचे से लोग और बाइक सवार गुजर रहे थे। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों ने फोन में रिकॉर्ड किया, जिससे सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई।
घटना उस समय हुई जब लेपर्ड उदय विलास की पहाड़ियों से होकर धनमाता की पहाड़ियों की ओर जा रहा था। घाटी दरवाजे के नीचे से गुजरते समय कई बाइक सवार और पैदल लोग रास्ता पार कर रहे थे। लोगों ने सुरक्षा के लिए चिल्लाते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी। शोर सुनकर लेपर्ड भी खड़ा होकर लोगों को घूरने लगा। इस दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसकी वीडियो भी बनाई, जिसमें लेपर्ड की सतर्कता और उसके आसपास के माहौल का अंदाज़ स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
घाटी मोहल्ले के इस क्षेत्र में नजदीकी स्कूल और आवासीय क्षेत्र होने के कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया। निसार ए हाली प्राइवेट स्कूल और सरकारी स्कूल के पास बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं, जबकि आसपास घनी आबादी बसी हुई है। लेपर्ड के इतने नजदीक दिखाई देने से लोग उसके सुरक्षित रेस्क्यू की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिनों पहले बांसड़वाड़ा के उदय विलास की पहाड़ियों पर तीन लेपर्ड एक साथ देखे गए थे, जो पत्थरों पर बैठकर अटखेलियां कर रहे थे। इसके बाद भी कुछ दिन में एक लेपर्ड आबादी की ओर आया था, लेकिन बाद में वापस पहाड़ी की ओर चला गया।
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि यह इलाके वन्यजीव और आवासीय क्षेत्र के सीमा-संपर्क का परिणाम है। अधिकारियों ने लोगों से सावधानी बरतने और बिना जरूरत जंगल की ओर न जाने की अपील की है। वहीं, वन विभाग के कर्मचारी इलाके में लेपर्ड की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं और जल्द ही उसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बना रहे हैं।
यह घटना शहर में वन्यजीव और मानव के बीच के बढ़ते तनाव को उजागर करती है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की निगरानी के बावजूद ऐसे मौके बढ़ रहे हैं, जिससे बच्चों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा होती है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
